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Chaitra Navratri 2019 : थॉयराइड और कैंसर को करना है जड़ से खत्म, तो नवरात्रि में जानिए अश्वगंध के फायदे

सभी जड़ी-बूटियां किसी ना किसी रोग के लिए कारगर होती हैं, लेकिन इनमें से कुछ ऐसी भी हैं, जिनका इस्तेमाल एक से अधिक बीमारियों को दूर करने के लिए किया जाता है। इसलिए आज हम आपको अश्वगंध के फायदे (Ashvgandh Benefits) और उसका सेवन करने का तरीका बता रहे हैं। जिससे आप हमेशा खुद को और अपनों को स्वस्थ रख सकें।

Chaitra Navratri 2019 : थॉयराइड और कैंसर को करना है जड़ से खत्म, तो नवरात्रि में जानिए अश्वगंध के फायदे

Chaitra Navratri 2019 : सभी जड़ी-बूटियां किसी ना किसी रोग के लिए कारगर होती हैं, लेकिन इनमें से कुछ ऐसी भी हैं, जिनका इस्तेमाल एक से अधिक बीमारियों को दूर करने के लिए किया जाता है। इसलिए आज हम आपको अश्वगंध के फायदे (Ashvgandh Benefits) और उसका सेवन करने का तरीका बता रहे हैं। जिससे आप हमेशा खुद को और अपनों को स्वस्थ रख सकें।

अश्वगंध के फायदे (Ashvgandh Benefits) :

इसका वानस्पतिक नाम विदानिया सोम्नीफेरा है। इसका पौधा झाड़ीदार होता है, जिसकी ऊंचाई आमतौर पर 3−4 फुट होती है। औषधि के रूप में मुख्यतः इसकी जड़ों का प्रयोग किया जाता है। कहीं-कहीं इसकी पत्तियों का प्रयोग भी किया जाता है। अश्वगंधा शरीर की बिगड़ी हुए व्यवस्था को ठीक करने के प्रचलित है। एक अच्छा वातशामक होने के अलावा यह थकान का निवारण में भी बेहद कारगर है।
1 इसकी जड़ों का सेवन रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और माना जाता है कि प्रसव के बाद महिलाओं को बल देने के लिए भी अश्वगंधा की जड़ों का सेवन जरूर कराना चाहिए।
2 प्रतिदिन अश्वगंधा के चूर्ण की एक-एक ग्राम मात्रा तीन बार लेने पर शरीर में हीमोग्लोबिन, लाल रक्त कणों की संख्या में काफी इजाफा होता है तथा इसके सेवन से बालों का कालापन भी बढ़ता है।
3 रक्त में घुलनशील वसा का स्तर कम होता है तथा रक्त कणों के बैठने की गति भी कम होती है।
4 अश्वगंधा के प्रत्येक 100 ग्राम में 789.4 मिलीग्राम लोहा पाया जाता है। लोहे के साथ ही इसमें पाए जाने वाले मुक्त अमीनो अम्ल इसे एक अच्छा हिमोटिनिक (रक्त में लोहा बढ़ाने वाला) टॉनिक बनाते हैं। कफ तथा वात संबंधी दोषों को दूर करने की शक्ति भी इसमें होती है।
5 थायराइड या अन्य ग्रंथियों की वृद्धि में इसके पत्तों का लेप करने से फायदा होता है। यह नींद लाने में भी सहायक होता है। श्वास संबंधी रोगों के निदान के लिए अश्वगंधा क्षार अथवा चूर्ण को शहद तथा घी के साथ दिया जाता है।
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