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इमली के अजब-गजब देसी हर्बल नुस्खे

इमली सबसे ज्यादा उपयोग में लायी जाती है।

इमली के अजब-गजब देसी हर्बल नुस्खे
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इमली से हम सभी भलिभांति परिचित हैं, पानीपुरी का पानी तैयार करना हो या खाद्य पदार्थों में खटाई या चटनी की बात हो, इमली सबसे ज्यादा उपयोग में लायी जाती है। खान-पान में इमली के महत्व को लगभग हर कोई जानता है, लेकिन इमली के औषधीय गुणों से ज्यादा लोग परिचित नहीं हैं।

इमली का वानस्पतिक नाम टैमेरिन्डस इंडिका है। आदिवासी हर्बल जानकार इमली को अनेक हर्बल नुस्खों के तौर पर अपनाते हैं। चलिए आज जानते है इमली से जुड़े कुछ अजब-गजब हर्बल नुस्खों के बारे में जिन्हें शायद कम लोग ही जानते हैं।

1. गुजरात के आदिवासी अजवायन, इमली के बीज और गुड़ की समान मात्रा लेकर घी में अच्छी तरह भून लेते है और फ़िर इसकी कुछ मात्रा प्रतिदिन नपुंसकता से ग्रसित व्यक्ति को देते है, इन आदिवासियों के अनुसार ये मिश्रण पौरुषत्व बढाने के साथ-साथ शुक्राणुओं की संख्या बढाने में भी मदद करता है।

2. इमली के बीजों को भूनकर पीस लिया जाए और इसकी 3 ग्राम मात्रा को गुनगुने पानी के साथ देने से दस्त में आराम मिलता है।

3. पातालकोट में आदिवासी इमली की पत्तियों को कुचलकर रस को घाव पर लगाते हैं, माना जाता है कि पत्तियां घाव को अतिशीघ्र सुखाने में मदद करती हैं।

4. इमली की पत्तियों और फूल को एकत्र कर पानी के साथ उबालकर काढा तैयार किया जाता है और इस काढे का सेवन पीलिया से ग्रसित व्यक्ति को दिया जाता है। माना जाता है कि इस काढे का सेवन एक सप्ताह तक प्रतिदिन दो बार करने से काफी फायदा करता है।

5. पके हुए इमली के फलों को पानी के साथ मसलकर रस तैयार किया जाता है और हल्की सी मात्रा में काला नमक डालकर सेवन किया जाए तो भूख लगने लगती है। प्रतिदिन दो बार ऐसा करने से भूख ना लगने की शिकायत दूर हो जाती है।

6. पके हुए इमली के फलों के रस की करीब 15 ग्राम मात्रा बुखार से ग्रसित रोगी को दिया जाए तो बुखार उतर जाता है। डांग गुजरात के आदिवासी मानते हैं कि इस रस के साथ इलायची और कुछ मात्रा में खजूर भी मिला दिया जाए तो ज्यादा असरकारक होता है।

7. पातालकोट में आदिवासी हर्बल जानकार इमली की पत्तियों को मिट्टी के बर्तन में भून लेते है, जब पत्तियां जल जाती हैं तो इन्हें रगड़कर चूर्ण तैयार कर लिया जाता है। एक चम्मच तिल के तेल में करीब 4 ग्राम जली हुई पत्तियों के चूर्ण को मिलाकर जले हुए शारीरिक अंग पर लगाने से जलन शांत होती है और घाव जल्दी सूखता है।

8. इमली की पत्तियों को पानी के साथ कुचलकर लेप तैयार किया जाए और जोड दर्द वाले हिस्सों या सूजन वाले अंगों पर लेपित करके सूती कपडे से बांधकर रखा जाए तो दर्द अथवा सूजन में तेजी से आराम मिलता है।

9. पत्तियों को कुचलकर रस तैयार करके कुल्ला किया जाए तो गले की खराश दूर हो जाती है, पकी हुई इमली के फलों का रस भी कुल्ला किया जाए तो समस्या में आराम मिलता है।

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