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मोहम्मद रफी की पुण्यतिथि आज, सुनिए उनके सदाबहार गाने

मोहम्मद रफी फैंस के दिलों में आज भी जिंदा हैं।

मोहम्मद रफी की पुण्यतिथि आज, सुनिए उनके सदाबहार गाने

न फनकार तुझ सा तेरे बाद आया, मोहम्मद रफी तू बहुत याद आया..... रविवार को बालीवुड के लीजेंड सिंगर मोहम्मद रफी के याद में महाकौशल कला परिषद द्वारा रफी नाम एक शाम रफी के नाम संगीत कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

जिसमें शहर के स्थानीय युवा कलाकारों ने रफी के हर दिल अजीज नगमे गा कर रफी साहब को ट्रिब्यूट किया। इसके अलावा प्रदेश के जानेमाने कलाकारों गुरूदयाल सिंह कलसी,जितेंद्र चड्ढा, नवाब सिराजुद्दीन, किशोरी अवधिया जैसे दिवंगत कलाकारा को भी श्रंद्वांजलि दिया गया।

स्थानीय गायक घनश्याम शर्मा ने अपने रूहानी आवज में दिल एक मंदिर है...,निजामुद्दीन तिगाला ने हुस्न वाले तेरा जवाब नहीं...,नीरज वैद ने कौन है जो सपने में आया..., पुकारता चला हुं मैं... मोहम्मद रफी के सदाबहार नगमों की झड़ी लगाकर संगीत प्रेमियों को इस सावन में रफी के सुर से भी गाया।

फैंस के यादों में फिर जिंदा हुए रफी

वैसे तो रफी संगीत के दूनिया में अमर हो गये हैं। पर इसके साथ ही अपने फैंस के दिलों में भी वे हमेशा जिंदा हैं। यही भाव याद -ए-रफी संगीत कार्यक्रम में देखने को मिला। अपने जमाने में कॉलेज कैंपस और लड़कियों को देखकर रफी साहब के गाने गुनगुनाने वाले

वरिष्ठ संगीत प्रेमियों के चेहरे पर रफी साहब के नगमें सुनते ही चमक आ गई। स्थानीय कलाकारों ने रफी साहब को याद करते हुए उनके तराने अपने जादू भरी आवज से मनमोहक प्रस्तुति देते हुए संगीत प्रेमियों का दिल जीत लिया।

सदाबहार नगमों से सजी महफिल ए शाम

क्या हुआ तेरा वादा...,बहारो फुल बरसाओ...,लिखे जो खत तुझे...,नफरत की दुनिया को झोड़कर...,आज मौसम बड़ा बेईमान है... जैसे सदाबहार रफी के तरानों से महफिल में सावन की बहार आ गई। फैंस का रोम रोम इन नगमों को सुर कर झूम उठा।

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