आम आदमी पार्टी से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने आज संसद बजट सत्र के दौरान ऐसी मांग रखी, जिससे सभी चौंक गए। उन्होंने केंद्र सरकार के समक्ष मांग रखी कि जैसे भारतीय वोटरों को चुनने का अधिकार है, वैसे ही उन्हें वापस बुलाने का भी अधिकार होना चाहिए। उन्होंने मांग रखी कि वोटरों के पास विधायकों और सांसदों को हटाने के लिए राइट टू रिकॉल नियम लागू होना चाहिए।
आप सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि अगर हमारे पास राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, जजों को हटाने और सत्ता में चल रही सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लोकर उसे बर्खास्त करने का अधिकार है तो जनता के पास ऐसा अधिकार क्यों नहीं? उन्होंने कहा कि मैं सदन में यह मांग रखता हूं कि जैसे भारतीय वोटरों को चुनने का अधिकार है, वैसे ही वापस बुलाने का भी अधिकार होना चाहिए। देश के मतदाता अगर अपने नेता को हायर कर सकते हैं तो काम न करने पर उसे फायर करने की भी शक्ति मिलनी चाहिए।
नेताओं को वापस बुलाने का समय लंबा
आप सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि पांच साल बहुत लंबा समय है। ऐसा कोई पेशा नहीं है जहां आप पांच साल तक बिना किसी परिणाम के खराब प्रदर्शन करते रहें। दुनिया के 24 से अधिक लोकतांत्रिक देश जैसे कि संयुक्त राज्य अमेरिका, स्विट्जरलैंड आदि में किसी न किसी रूप में वापस बुलाने या मतदाता द्वारा शुरू की गई हटाने की व्यवस्था है। अगर भारतीय मतदाताओं को चुनाव का अधिकार है, तो उन्हें वापस बुलाने का अधिकार भी होना चाहिए। हालांकि आप सांसद ने इस नियम के दुरुपयोग को रोकने के लिए सुरक्षा उपाय भी सुझाए हैं।
If voters can HIRE a neta, they should be able to FIRE the neta too.
— Raghav Chadha (@raghav_chadha) February 11, 2026
If Indian voters have the Right to Elect, they should have the ‘RIGHT TO RECALL’ too.
Right to Recall is a mechanism that empowers voters to de-elect an elected representative, before their term ends, if they… pic.twitter.com/6mB4gpQKPu
राघव चड्ढा ने दिए ये सुझाव
उन्होंने कहा कि किसी भी प्रतिनिधि को पद से हटाने के लिए मतदान होने से पहले कम से कम 35 से 40 प्रतिशत मतदाताओं को सत्यापित याचिका के माध्यम से समर्थन देना चाहिए। चुनाव के बाद कम से कम 18 महीने का समय दिया जाना चाहिए ताकि प्रतिनिधि को कार्य करने का समय मिले और जीतने के तुरंत बाद उसे निशाना न बनाया जा सके। प्रतिनिधि को केवल सिद्ध दुर्व्यवहार, धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार या कर्तव्य की गंभीर उपेक्षा के मामलों में ही पद से हटाया जा सकता है, न कि रोजमर्रा के राजनीतिक मतभेदों के आधार पर। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधि को पद से हटाना तभी सफल माना जाएगा, जब 50 प्रतिशत से अधिक मतदाता प्रतिनिधि को हटाने के लिए मतदान में समर्थन दें। उन्होंने कहा कि यह नागरिक सशक्तिकरण है। यह पार्टियों को अच्छा प्रदर्शन करने वाले उम्मीदवारों को मैदान में उतारने, भ्रष्टाचार को कम करने और लोकतंत्र को जवाबदेही की ओर वापस लाने के लिए प्रेरित करेगा।











