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दिल्ली क्राइम ब्रांच के मुताबिक, 12 जनवरी को ई-एफआईआर दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि फर्जी सिम पोटिंग कर साइबर अपराधियों ने उसके 38 लाख से अधिक के रुपये ठग लिए हैं। जानिये कैसे पकड़े गए...

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 38 लाख से अधिक की साइबर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को अरेस्ट किया है। जांच से पता चला कि आरोपी व्हाट्सएप कॉल और मैसेज के जरिये लोगो को झांसे में लेते और मोबाइल का एक्सेस लेकर पैसे निकाल लेते। पुलिस का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ जारी है। पूछताछ के बाद ठगी के कई अन्य मामलों का खुलासा होने की उम्मीद है। 

डीसीपी क्राइम ब्रांच आदित्य गौतम के मुताबिक, 12 जनवरी को ई-एफआईआर दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता ने बताया था कि 30 दिसंबर 2025 से 12 जनवरी 2026 के बीच अज्ञात लोगों ने उसके मोबाइल नंबर को अवैध तरीके से पोर्ट कर विभिन्न बैंक खातों से 39 लाख 10 हजार 341 रुपये निकाल लिए। उन्होंने बताया कि मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई। क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ने बैंक खातों, ट्रांजेक्शन डिटेल और मोबाइल डेटा समेत तकनीकी सबूत एकत्रित करने शुरू कर दिए। 

उन्होंने बताया कि मामले की जांच के बाद आरोपियों की पहचान सुनिश्चित हो गई। पुलिस ने सबसे पहले नोएडा निवासी विपुल कश्यप को गिरफ्तार किया। पूछताछ के बाद उसने बताया कि मुख्य साजिशकर्ता आयुष शर्मा (21) है। पुलिस ने उसे भी नोएडा से अरेस्ट कर लिया।  उन्होंने बतााया कि आरोपियों से पूछताछ जारी है। पूछताछ के दौरान कई अहम खुलासे होने की उम्मीद है। 

ऐसे करते थे साइबर ठगी

पुलिस ने बताया कि आरोपी व्हाट्सएप कॉल या मैसेज भेजकर लोगों को अपने में झांसे में लेते और उनका मोबाइल नंबर का एक्सेल ले लेते। इसके बाद एमएमएस और कॉल फॉरवर्डिंग के माध्यम से ओटीपी हासिल करते और मोबाइल नंबर को दूसरे सर्किल में पोर्ट कर बैंकिंग ऐप के माध्यम से अलग-अलग खातों से रकम ट्रांसफर करते। पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान एक खाता मिला, जिसमें 99999 रुपये ट्रांसफर हुए थे। इसकी जांच के बाद ही आरोपी विपुल कश्यप पुलिस की रडार पर आ गया था। 

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