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दिल्ली में जनवरी माह के दौरान 800 से ज्यादा लोगों के लापता होने पर दिल्ली हाईकोर्ट ने चिंता जताई है। माननीय उच्च न्यायालय ने मामले पर केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

देश की राजधानी दिल्ली से जनवरी 2026 के दौरान 800 से ज्यादा लोगों के लापता होने की खबर के बाद से हड़कंप मचा है। विशेषकर लापता लोगों में बच्चों की संख्या ज्यादा है, जिस कारण अभिभावक उनकी सुरक्षा को लेकर विशेष एहितयात बरत रहे हैं। इसी कड़ी में यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट भी पहुंच चुका है। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस के साथ ही राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो को नोटिस जारी किया है। 

दिल्ली से लापता व्यक्तियों की संख्या बढ़ाने पर चिंता जताते हुए याचिका दायर की गई थी। चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र और दिल्ली सरकार के साथ-साथ दिल्ली पुलिस और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो को नोटिस जारी कर संबंधित अधिकारियों से एक सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल कर जवाब देने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 18 फरवरी को होगी। 

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग न भी मांगी थी रिपोर्ट

बता दें कि दिल्ली में बीते महीने 800 से अधिक लोगों की गुमशुदगी के मामले पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस और पुलिस आयुक्त को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सब्मिट करने के आदेश दिए थे।

गुमशुदगी मामले से सियासत तेज 

दिल्ली से बच्चों, महिलाओं और युवाओं की गुमशुदगी के चलते सियासत उफान पर है। आम आदमी पार्टी, दिल्ली के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया था कि एक तरफ जहां राजधानी से लोग लापता हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली की बीजेपी सरकार झूठ बोलकर लोगों को गुमराह कर रही है। यही नहीं, सीएम रेखा गुप्ता के विधानसभा क्षेत्र यानी शालीमार बाग में भी लापता लोगों की फोटो एक पोस्टर पर चस्पा कर दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस को घेरा था। उधर, मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से बताया गया था कि दिल्ली पुलिस ने लोगों के लापता होने के पीछे ह्यूमन ट्रैफिकिंग की आशंका से इनकार किया था। 

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