Nitish Kumar Rajya Sabha Oath: बिहार के सियासी गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार आगामी 10 अप्रैल 2026 को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। खबरों के मुताबिक, नीतीश कुमार 9 अप्रैल को ही दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगे। राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करने के साथ ही बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों पर भी मुहर लगती दिख रही है। माना जा रहा है कि खरमास (14 अप्रैल) खत्म होने के बाद राज्य में नई सरकार का गठन होगा और बिहार को नया मुख्यमंत्री मिल सकता है।
इस्तीफे के बाद भी बरकरार रहेगी 'Z प्लस' सुरक्षा
नीतीश कुमार भले ही मुख्यमंत्री का पद छोड़ दें, लेकिन उनकी सुरक्षा में कोई कमी नहीं की जाएगी। बिहार गृह विभाग ने गुरुवार को स्पष्ट आदेश जारी किया है कि नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद भी 'Z प्लस' (Z Plus) कैटेगरी की सुरक्षा मिलती रहेगी। बिहार विशेष सुरक्षा अधिनियम, 2000 के प्रावधानों के तहत उनकी सुरक्षा आवश्यकताओं की समीक्षा के बाद यह फैसला लिया गया है। राज्यसभा सदस्य बनने के दौरान भी डीजीपी और स्पेशल ब्रांच को उनकी उच्चतम स्तर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
क्या है Z+ सुरक्षा और क्यों है खास?
भारत में 'Z प्लस' सुरक्षा सर्वोच्च स्तर का सुरक्षा घेरा है, जो प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और देश के अति-विशिष्ट राजनेताओं को दिया जाता है। इस सुरक्षा कवर में लगभग 55 जवान तैनात होते हैं, जिनमें पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (PSO), हथियारबंद गार्ड और पायलट गाड़ियां शामिल होती हैं। नीतीश कुमार को चौबीसों घंटे कड़ी निगरानी और मल्टी-लेयर्ड सुरक्षा घेरे में रखा जाएगा, ताकि उनकी सुरक्षा में कोई चूक न हो।
विधान परिषद से इस्तीफा और नई संवैधानिक स्थिति
नीतीश कुमार ने 16 मार्च को राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद 30 मार्च को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस कदम के बाद से ही बिहार में नए मुख्यमंत्री को लेकर कयासों का बाजार गर्म है। हालांकि, संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार कोई भी व्यक्ति विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य न रहते हुए भी 6 महीने तक मुख्यमंत्री के पद पर बना रह सकता है। लेकिन सूत्रों का दावा है कि नीतीश कुमार जल्द ही कमान किसी और को सौंपकर दिल्ली में अपनी नई भूमिका पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
14 अप्रैल के बाद टिकी हैं सबकी नजरें
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि 14 अप्रैल के बाद बिहार कैबिनेट में बड़ा फेरबदल हो सकता है। जेडीयू और गठबंधन के सहयोगियों के बीच नए मुख्यमंत्री के नाम को लेकर मंथन जारी है। नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना राज्य की राजनीति में एक युग के अंत और एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि नीतीश कुमार की कुर्सी पर ताजपोशी किसकी होती है।










