Bihar New CM: बिहार की राजनीति इस वक्त अपने सबसे बड़े बदलाव के मुहाने पर खड़ी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रदेश की कमान किसके हाथों में होगी। इस बीच, दिल्ली से भाजपा सांसद और भोजपुरी सुपरस्टार मनोज तिवारी ने एक बड़ा बयान देकर सियासी गलियारों में गर्मी बढ़ा दी है। मनोज तिवारी ने संकेत दिया है कि 10 अप्रैल तक बिहार के नए मुख्यमंत्री के नाम पर स्थिति पूरी तरह साफ हो जाएगी।
नीतीश कुमार का इस्तीफा और राज्यसभा का सफर
नीतीश कुमार ने 16 मार्च 2026 को राज्यसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी। नियम के मुताबिक, उन्हें 14 दिनों के भीतर विधान परिषद (MLC) की सदस्यता छोड़नी थी, जिसे उन्होंने 30 मार्च को पूरा कर दिया। अब चर्चा है कि जैसे ही नीतीश कुमार राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेंगे, वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे। इसके बाद एनडीए की नई सरकार के गठन और नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण की प्रक्रिया शुरू होगी।
क्या भाजपा से होगा अगला मुख्यमंत्री?
सियासी गलियारों में इस बात की प्रबल संभावना है कि इस बार बिहार की कमान भारतीय जनता पार्टी (BJP) के किसी नेता को मिलेगी। मनोज तिवारी ने साफ किया कि यह एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया है और एनडीए के शीर्ष नेता मिलकर इस पर अंतिम फैसला लेंगे। भाजपा के भीतर कई कद्दावर चेहरे इस रेस में शामिल हैं, जिनमें वर्तमान डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे चल रहा है। उनके अलावा केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय, विजय सिन्हा और मंगल पांडेय के नामों की भी चर्चा जोरों पर है।
जातीय समीकरण और नीतीश की मर्जी का खेल
भाजपा ने हाल के दिनों में मध्य प्रदेश, राजस्थान और ओडिशा जैसे राज्यों में नए चेहरों को मुख्यमंत्री बनाकर सबको चौंकाया है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि बिहार में भाजपा 'सरप्राइज कार्ड' खेलने के बजाय जातिगत समीकरणों को साधने वाले अनुभवी चेहरे पर दांव लगाएगी। जेडीयू के सूत्रों का यह भी कहना है कि नया मुख्यमंत्री एनडीए की आपसी सहमति और खुद नीतीश कुमार की 'गुड बुक' में शामिल नेता ही बनेगा, ताकि गठबंधन में सामंजस्य बना रहे।
10 अप्रैल की तारीख क्यों है अहम?
मनोज तिवारी के अनुसार, 10 तारीख तक लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत सभी पहलुओं पर विचार कर लिया जाएगा। बिहार में सत्ता परिवर्तन का यह दौर केवल एक व्यक्ति का बदलाव नहीं, बल्कि 2025-26 के चुनावी समीकरणों की बिसात भी है। भाजपा और जेडीयू दोनों ही ऐसे चेहरे की तलाश में हैं जो पिछड़ा-अति पिछड़ा और सवर्ण वोटों के संतुलन को बनाए रख सके।










