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पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने कहा कि पांच राज्यों में जारी विधानसभा चुनावों के कारण फिलहाल महंगाई को दबाकर रखा गया है। कमर्शियल सिलेंडर के दाम पहले ही 525 रुपये बढ़ चुके हैं और पेट्रोल, सीमेंट, ब्रेड से लेकर जूते-चप्पल तक महंगे हो गए हैं।

आम आदमी पार्टी (AAP) ने देश में लगातार बढ़ती कीमतों और आर्थिक संकट को लेकर केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आप के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने बुधवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान में पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनावों के कारण सरकार ने जानबूझकर घरेलू गैस और ईंधन की कीमतों को नियंत्रित कर रखा है, लेकिन मतदान प्रक्रिया समाप्त होते ही आम जनता की जेब पर भारी बोझ डालने की तैयारी पूरी हो चुकी है। 

चुनाव के बाद घरेलू सिलेंडर की कीमतों में होगा बेतहाशा इजाफा 
पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए अनुराग ढांडा ने कहा कि देश इस समय एक अत्यंत संवेदनशील और गंभीर आर्थिक दौर से गुजर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार महंगाई के वास्तविक आंकड़ों को छिपाने की कोशिश कर रही है ताकि आगामी चुनावों में उसे नुकसान न हो। ढांडा ने चेतावनी देते हुए कहा कि कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में पहले ही 525 रुपये की भारी बढ़ोतरी की जा चुकी है। चूंकि कमर्शियल और घरेलू सिलेंडर में एक ही गैस होती है, इसलिए यह साफ है कि जैसे ही चुनाव खत्म होंगे, सरकार घरेलू सिलेंडरों के दाम बढ़ाकर आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ देगी।

ब्रेड से लेकर जूते-चप्पल तक हुए महंगे 
अनुराग ढांडा ने बाजार के ताजा आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि महंगाई केवल ईंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि दैनिक उपयोग की हर वस्तु अब आम आदमी की पहुंच से बाहर होती जा रही है। उन्होंने निम्नलिखित बिंदुओं पर सरकार को घेरा। 
• ईंधन की कीमतें: प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में पिछले एक महीने के भीतर ही 15 रुपये की वृद्धि दर्ज की गई है।
• रोजमर्रा का खान-पान: साधारण ब्रेड पैकेट की कीमत अचानक 30 रुपये से बढ़कर 35 रुपये हो गई है।
• निर्माण सामग्री: सीमेंट के प्रति कट्टे पर 50 से 100 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है, जिससे घर बनाना अब और भी महंगा हो गया है।
• पहनावा: जूते-चप्पलों जैसी बुनियादी जरूरतों की कीमतों में भी 25 प्रतिशत तक का उछाल आया है। 

विमान ईंधन और टोल टैक्स में बढ़ोतरी से बढ़ा परिवहन का बोझ 
आम आदमी पार्टी के नेता ने विमान ईंधन (ATF) की कीमतों में हुई वृद्धि पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि घरेलू उड़ानों के लिए ईंधन के दाम 8.5 प्रतिशत और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए 114 प्रतिशत से अधिक बढ़ा दिए गए हैं। इसका सीधा परिणाम हवाई किरायों में बढ़ोतरी के रूप में सामने आएगा, जिससे घरेलू यात्रा पर कम से कम 500 रुपये और अंतरराष्ट्रीय टिकटों पर 200 डॉलर से अधिक का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। साथ ही, सरकार द्वारा टोल टैक्स में की गई 5 प्रतिशत की वृद्धि ने माल ढुलाई और निजी यात्रा को और अधिक खर्चीला बना दिया है।

जनता लाइनों में पस्त 
अनुराग ढांडा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि जब पूरा देश महंगाई के खौफ में जी रहा है और लोग गैस सिलेंडरों के लिए लंबी कतारों में खड़े हैं, तब प्रधानमंत्री चुनावी रैलियों और उद्घाटन कार्यक्रमों में व्यस्त हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री उन हवाई अड्डों का फीता काट रहे हैं जहां से उड़ानें महीनों बाद शुरू होनी हैं। वे कहीं रोड शो कर रहे हैं, कहीं रेल को हरी झंडी दिखा रहे हैं, तो कहीं असम के बागानों में चाय की पत्तियां तोड़ रहे हैं। ऐसा लगता है कि वे जिस चीज को छू लेते हैं, वह और भी महंगी हो जाती है।  

कालाबाजारी पर सरकार मौन
आप प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि बढ़ती महंगाई और किल्लत के कारण शहरों से मजदूर और गरीब वर्ग ने एक बार फिर पलायन शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि अमीर और मध्यम वर्ग शायद ब्लैक में महंगा सिलेंडर खरीद भी ले, लेकिन वह गरीब आदमी क्या करे जो रोज एक-एक किलो गैस भरवाकर अपना गुजारा करता है? ढांडा ने सरकार पर कालाबाजारी रोकने में विफल रहने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार स्टॉक होने का दावा तो करती है, लेकिन धरातल पर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कोई ठोस योजना नहीं है। 

आपदा में अवसर तलाशने का गंभीर आरोप
अनुराग ढांडा ने अंत में एक बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मोदी सरकार जानबूझकर देश में कोरोना काल जैसी अनिश्चितता और संकट के हालात पैदा कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने पहले ही संकेत दे दिया था कि स्थितियां कोरोना जैसी होने वाली हैं। अब ऐसा प्रतीत होता है कि वे खुद ऐसी परिस्थितियां बना रहे हैं ताकि इस 'आपदा में अवसर' तलाश कर अपने चहेते उद्योगपति मित्रों को मोटा मुनाफा कमाने का मौका दिया जा सके। सरकार वास्तविक संकट पर काम करने के बजाय देश को जबरन बर्बादी की ओर धकेल रही है। 

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