पंकज गुप्ते- बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर के चौक-चौराहों पर स्थापित महापुरुषों और छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमाओं पर जमी धूल अब न्यायालय की नजर में आ गई है। मीडिया में दिखाई गई तस्वीरों को संज्ञान में लेते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नगर निगम की सफाई व्यवस्था पर सख्त रुख अपनाया है और निगम आयुक्त से शपथपत्र के जरिए विस्तृत जवाब मांगा है। मामले को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई 9 अप्रैल तय की गई है।
दरअसल मीडिया ने अपनी खबरों पर यह उजागर किया गया था कि शहर की प्रमुख प्रतिमाओं की नियमित साफ-सफाई नहीं हो रही है और कई स्थानों पर ये अंधेरे में भी डूबी रहती हैं। विशेष अवसरों पर केवल औपचारिकता निभाते हुए पानी छिड़ककर और फूल-मालाएं चढ़ाकर खानापूर्ति कर दी जाती है, लेकिन बाद में फिर उपेक्षा का शिकार हो जाती हैं। नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक, प्रतिमाओं की सफाई की जिम्मेदारी लायन सर्विसेस कंपनी को दी गई है, लेकिन कंपनी समय-समय पर कार्य नहीं कर रही है। सफाईकर्मी मुख्यतः सड़कों पर झाड़ू लगाने तक ही सीमित हैं, जबकि ठेका शर्तों में मूर्तियों, डिवाइडर और फुटपाथ की सफाई भी शामिल है।
निगम आयुक्त विस्तृत शपथ पत्र प्रस्तुत करने के दिए निर्देश
अधिकारियों ने भी माना कि नियमित सफाई के अभाव में प्रतिमाओं पर धूल की परत जम रही है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए बुधवार को अपनी डिवीजन बेंच में सुनवाई की। नगर निगम की ओर से वकील अनादि शर्मा ने पक्ष रखते हुए बताया कि शहर में समय-समय पर सफाई कराई जा रही है। साथ ही निगम आयुक्त द्वारा सभी जोन कमिश्नरों को नया आदेश जारी कर सफाई के लिए रोस्टर भी तैयार किया गया है, ताकि नियमित व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके। हालांकि, कोर्ट ने इन दलीलों के बीच संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर निगम आयुक्त को निर्देश दिया है कि वे इस मामले में विस्तृत शपथपत्र प्रस्तुत करें। अब इस मामले की अगली सुनवाई 9 अप्रैल को होगी, जहां निगम की सफाई व्यवस्था पर अदालत की नजर बनी रहेगी।








