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ईरान-इजरायल युद्ध के बीच समुद्री जहाज पर हुए ड्रोन हमले में जान गंवाने वाले भागलपुर के चीफ इंजीनियर देवनंदन प्रसाद सिंह का पार्थिव शरीर 20 दिन बाद पटना पहुंचा। जानें क्या थी पूरी घटना।

Bihar Engineer Death Iran Israel War: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध और तनाव ने बिहार के एक परिवार को कभी न भूलने वाला जख्म दिया है। भागलपुर जिले के सन्हौला प्रखंड के रानी बमिया गांव निवासी और मर्चेंट नेवी में चीफ इंजीनियर के पद पर तैनात देवनंदन प्रसाद सिंह का पार्थिव शरीर गुरुवार को करीब 20 दिनों के लंबे इंतजार के बाद पटना पहुंचा। हवाई अड्डे पर शव पहुंचते ही परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया। एंबुलेंस के जरिए उनके पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव ले जाया जा रहा है, जहां पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनके अंतिम संस्कार की तैयारी की जा रही है।

ड्रोन हमले का शिकार हुआ था 'सेफसी विष्णु' जहाज
मिली जानकारी के अनुसार, यह दर्दनाक हादसा 11 मार्च 2026 को हुआ था। देवनंदन प्रसाद सिंह अमेरिकी तेल टैंकर ‘सेफसी विष्णु’ पर चीफ इंजीनियर के रूप में कार्यरत थे। यह जहाज थाईलैंड से भारत की ओर आ रहा था, तभी इराक के समुद्री क्षेत्र में ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच चल रहे सैन्य तनाव के दौरान इसे निशाना बनाया गया। एक शक्तिशाली ड्रोन हमले की चपेट में आने से देवनंदन सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए और मौके पर ही उन्होंने दम तोड़ दिया। इस हमले ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और युद्ध के खतरों को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

बिहार से मुंबई तक फैला था परिवार का सपना
देवनंदन प्रसाद सिंह एक बेहद मेहनती और समर्पित प्रोफेशनल थे। साल 2019 में बेहतर भविष्य और बच्चों की शिक्षा के लिए वे अपने परिवार के साथ बिहार से मुंबई शिफ्ट हो गए थे। वे लंबे समय से समुद्री जहाजों पर अपनी सेवाएं दे रहे थे और अपने परिवार के एकमात्र आर्थिक आधार थे। उनकी असमय मौत ने न केवल उनके परिवार को झकझोर दिया है, बल्कि मुंबई में रह रहे उनके करीबियों को भी गहरे सदमे में डाल दिया है।

सरकार से गुहार के बाद लौटा 'गांव का गौरव'
इंजीनियर देवनंदन सिंह की मौत की खबर मिलने के बाद पिछले 20 दिनों से उनका परिवार दिल्ली से लेकर पटना तक सरकार के चक्कर लगा रहा था। शव को अंतरराष्ट्रीय प्रक्रियाओं और कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर भारत वापस लाने में लंबा समय लगा। रानी बमिया गांव के लोगों को अपने इस होनहार इंजीनियर पर बहुत गर्व था, जो सात समंदर पार देश का नाम रोशन कर रहा था। अब जब उनका शव गांव पहुंच रहा है, तो हर आंख नम है और गांव के 'गौरव' को अंतिम विदाई देने के लिए भारी भीड़ उमड़ रही है।

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