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जल्द खत्म होगा Sourav Ganguly और जय शाह का कार्यकाल, सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर आस

Sourav Ganguly Bcci President Tenure : सौरव गांगुली का कार्यकाल इस वर्ष जुलाई में खत्म हो रहा है, वहीं इसके साथ जय शाह बीसीसीआई सचिव पद का कार्यकाल जून में खत्म हो रहा है। आपको बता दें कि जय शाह भी बीसीसीआई से पहले गुजरात क्रिकेट के सचिव पद पर थे।

Sourav Ganguly और जय शाह का कार्यकाल खत्म होने के नजदीक, सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के अध्यक्ष सौरव गांगुली (Sourav Ganguly BCCI President Tenure) इस पद पर जब काबिज हुए थे, तब भारतीय क्रिकेट टीम (Indian Cricket Team) समेत पूरा देश खुश हुआ था क्योंकि सभी जानते थे कि सौरव गांगुली इस पोस्ट के लिए सबसे बेहतर हैं। लेकिन इसको लेकर एक निराशा ये भी थी कि सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) अधिक समय तक इस पोस्ट पर नहीं बने रह पाएंगे, क्योंकि इससे पहले वो 5 साल 3 महीने के लिए बंगाल क्रिकेट (Bengal Cricket Association) के अध्यक्ष पद पर थे।

नियमों के अनुसार कोई भी व्यक्ति राज्य बोर्ड और बीसीसीआई के आधिकारिक पद (BCCI Official Post) पर कुल 6 से साल से अधिक नहीं बना रह सकता, और उसे अनिवार्य छुट्टी लेनी पड़ती है। इस आधार पर सौरव गांगुली का कार्यकाल इस वर्ष जुलाई (Sourav Ganguly President Tenure End) में खत्म हो रहा है, वहीं इसके साथ जय शाह बीसीसीआई सचिव पद (Jay Shah Bcci Secretary) का कार्यकाल जून में खत्म हो रहा है। आपको बता दें कि जय शाह भी बीसीसीआई से पहले गुजरात क्रिकेट के सचिव पद पर थे।

बीसीसीआई ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा

बीसीसीआई की ओर से सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में याचिका दाखिल की गई है, इसमें कहा गया है कि बीसीसीआई ने पिछले साल हुई मीटिंग में इस नियम में संसोधन कर, कार्यकाल बढ़ाने को रजामंद हो गया था। इस संसोधन के अनुसार सौरव गांगुली और जय शाह को अनिवार्य ब्रेक तभी लेना पड़ेगा, जब वह BCCI पदों में रहकर 6 वर्ष पूरे कर लेंगे। यानी स्टेट क्रिकेट बोर्ड में पदों पर किए गए कार्यों को बीसीसीआई अफसर के पदों में शामिल नहीं किया जाए।

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बीसीसीआई को सुप्रीम कोर्ट से इजाजत लेने की जरुरत नहीं हो

आपको बता दें कि ये भी मांग की गई है कि BCCI ऑटोनोमस बॉडी है, और इनके खुद के कई अधिकार होते हैं। कहने का अर्थ है कि बीसीसीआई बिना सुप्रीम कोर्ट की अनुमति लिए ही, अपने फैसलों में बदलाव कर सके। यानी बीसीसीआई को सर्वोच्च न्यायालय की अनुमति की जरुरत ही न पड़े।

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