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Abdul Kalam Birth Anniversary: जानें भारत के मिसाइल मैन अब्दुल कलाम के इन अविष्कारों के बारे में

Abdul Kalam Birth Anniversary: भारत के पूर्व राष्ट्रपति मिसाइल मैन कहने जाने वाले डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की 15 अक्टूबर को 88वीं जयंती मनाई जाएगी। देश के पूर्व राष्ट्रपति ने कई महत्वपूर्ण खोज की जिनकी बदौलत भारत आज कई क्षेत्रों में शिखर पर है।

Abdul Kalam Birth Anniversary: जानें भारत के मिसाइल मैन अब्दुल कलाम के इन अविष्कारों के बारे में

Abdul Kalam Birth Anniversary: भारत के पूर्व राष्ट्रपति और मिसाइल मैन कहने जाने वाले डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम (APJ Abdul Kalam Birth Anniversary) की 15 अक्टूबर को 88वीं जंयती मनाई जा रही है। इस दिन पूरी दुनिया में विश्व छात्र दिवस (World Students Day) भी मनाया जाता है, जो उनको यूएन ने समर्पित किया था। वो एक महान वैज्ञानिक ही नहीं बल्कि विचारक और टीचर भी रह चुके हैं। उन्होंने अपने जीवन काल में लाखों युवाओं को प्रेरणा दी।

एपीजे अब्दुल कलाम को बैलेस्टिक मिसाइल और लॉन्चिंग टेक्नोलॉजी का अविष्कार करने की वजह से मिसाइल मैन भी कहा जाता है। उनका सफर काफी लंबा है। उन्होंने डीआरडीओ और इसरो में अपनी सेवाएं दीं। साल 1982 में कलाम को डीआरडीएल (डिफेंस रिसर्च डेवलपमेंट लेबोरेट्री) का डायरेक्टर बनाया गया।


जिसके बाद कलाम ने मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम को तैयार किया और भारत को टेक्नोलॉजी में एक महान देश बना दिया। उन्होंने भारत के लिए पृथ्वी, त्रिशूल, आकाश, नाग, ब्रह्मोस समेत कई मिसाइलें बनाई। वो कलाम ही थे जिनके नेतृत्व में देश को पहली स्वदेशी मिसाइल भी बनी।

ये हैं अब्दुल कलाम के अविष्कार

1. नंदी अविष्कार

2. पोखरण परमाणु परीक्षण

3. अग्नी और पृथ्वी स्वेदशी मिलाइल का निर्माण

4. दिल के मरीजों के लिए कोरोनरी स्‍टेंट का निर्माण किया था, जिसकी वजह से इस दवा की कीमत में काफी कमी आई थी।

5. ऑर्थोसिस कैलीपर्स का निर्माण

6. बैलिस्टिक मिसाइलों का निर्माण


लेकिन उनके इन परीक्षणों में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में किया गया पोखरण परीक्षण सबसे ज्यादा सुर्खियां में रहा। जिसमें भारत को परमाणु शक्तियों की श्रेणी में लाकर रख दिया। परमाणु परीक्षण के बाद जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका सहित कई प्रमुख देशों ने भारत पर कई प्रतिबंध लगा दिए। सबसे पहले पोखरण पार्ट-1 साल 1974 में परीक्षण किया गया था।

उसके बाद पोखरण पार्ट-2 के परीक्षण को पूरी तरह से गोपनीय रखा गया और इसकी जानकारी किसी को नहीं दी गई। वहीं दूसरी तरफ भारत का पहला स्वदेशी सैटेलाइट लॉन्च की गई। भारत ने सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल के बारे में कभी नहीं सोचा था। अपने पहले स्वदेशी एसएलवी को विकसित किया और जुलाई 1980 में एसएलवी III ने रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा में इंजेक्ट किया। जिसमें भारत को बड़ी कामयाबी मिली।

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