INS Aridhaman Nuclear Submarine: भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत और रणनीतिक मारक क्षमता में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट के जरिए भारत की तीसरी स्वदेशी परमाणु ऊर्जा संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN), INS Aridhaman के जल्द लॉन्च होने के संकेत दिए हैं।
उन्होंने लिखा- शब्द नहीं शक्ति है, 'अरिदमन'। वर्तमान में यह पनडुब्बी अपने अंतिम समुद्री परीक्षण पूरे कर चुकी है और जल्द ही इसे सामरिक बल कमान (Strategic Forces Command) के बेड़े में शामिल किया जाएगा।
शब्द नहीं शक्ति है, ‘अरिदमन’!
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) April 3, 2026
INS Aridhaman की मारक क्षमता और तकनीक
INS अरिधमन अपनी पूर्ववर्ती पनडुब्बियों, INS अरिहंत और INS अरिघात की तुलना में अधिक उन्नत और शक्तिशाली है। लगभग 7,000 टन वजन वाली इस पनडुब्बी के डिजाइन को पहले से अधिक सुव्यवस्थित (Streamlined) बनाया गया है, जिससे यह पानी के नीचे रडार की नजरों से बचकर शांति से दुश्मन पर नजर रख सकेगी। इसे भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) द्वारा विकसित 83 मेगावाट के उन्नत प्रेशराइज्ड वाटर रिएक्टर से शक्ति मिलती है।
सबसे खास बात इसकी मिसाइल क्षमता है। इसमें 8 वर्टिकल लॉन्च ट्यूब हैं, जो INS अरिहंत की तुलना में दोगुनी हैं। यह 3,500 किमी रेंज वाली 8 K-4 मिसाइलें या 750 किमी रेंज वाली 24 K-15 मिसाइलें ले जाने में सक्षम है।
सामरिक महत्व और 'सेकंड स्ट्राइक' क्षमता
भारत के लिए INS अरिधमन का शामिल होना रक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। परमाणु पनडुब्बियां (SSBN) भारत को एक विश्वसनीय 'सेकंड स्ट्राइक' क्षमता प्रदान करती हैं। इसका मतलब यह है कि यदि दुश्मन देश भारत के जमीनी परमाणु ठिकानों या हवाई अड्डों पर हमला करता है, तब भी समुद्र की गहराइयों में छिपी यह पनडुब्बी जवाबी परमाणु हमला कर दुश्मन को नेस्तनाबूद कर सकती है। भारत की 'नो फर्स्ट यूज' नीति के तहत यह पनडुब्बी एक मजबूत रक्षा कवच का काम करती है।
Taragiri भी नौसेना में शामिल
रक्षामंत्री का यह बयान उनके विशाखापत्तनम दौरे के दौरान आया है, जो भारत के परमाणु पनडुब्बी बेड़े का निर्माण केंद्र और होम पोर्ट है। इस दौरे पर वह स्वदेश निर्मित उन्नत स्टेल्थ फ्रिगेट 'तारागिरी' (Taragiri) को भी नौसेना में शामिल करने वाले हैं। तारागिरी फ्रिगेट आधुनिक हथियारों, सुपरसोनिक मिसाइलों और एंटी-सबमरीन युद्ध प्रणाली से लैस है।
Tomorrow, 03 April, I shall be in Visakhapatnam to attend the Commissioning Ceremony of the advanced stealth Frigate ‘Taragiri’.
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) April 2, 2026
This commissioning highlights the strategic and maritime importance of India’s eastern seaboard as well as the Indian Navy’s sustained focus on… pic.twitter.com/rOSxZ9Ftuz
यह न केवल युद्ध में बल्कि मानवीय सहायता और आपदा राहत कार्यों में भी नौसेना की बहुमुखी क्षमताओं को प्रदर्शित करेगा। चौथी पनडुब्बी के आने के बाद भारत हिंद महासागर में अपनी निरंतर मौजूदगी सुनिश्चित कर सकेगा।










