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​राज्यसभा ने ऐतिहासिक जन विश्वास (संशोधन) विधेयक 2026 को पारित कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे जीवन और व्यापार को आसान बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बताया है।

भारतीय संसदीय लोकतंत्र की मजबूती लिए एक बड़े कदम की शुरुआत हुई, जब राज्यसभा ने ध्वनि मत से 'जन विश्वास (संशोधन) विधेयक 2026' को पारित कर दिया। यह बिल लोकसभा से पहले ही पारित हो चुका था और अब राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून का रूप ले लेगा।

इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य देश के 42 विभिन्न अधिनियमों में मौजूद 183 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना है। सदन में चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्रियों ने स्पष्ट किया कि यह बिल नागरिकों और सरकार के बीच विश्वास बढ़ाने और न्यायपालिका पर बोझ कम करने के लिए लाया गया है।

विपक्ष के कुछ सवालों के बीच सरकार ने भरोसा दिलाया कि यह कानून छोटे व्यापारियों के लिए वरदान साबित होगा।

​पीएम मोदी ने बताया 'ईज ऑफ लिविंग' और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' का मंत्र 
विधेयक पारित होने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से देशवासियों को बधाई दी। पीएम मोदी ने कहा कि जन विश्वास बिल नागरिकों के जीवन और व्यापार को आसान बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार का लक्ष्य उन कानूनों को खत्म करना या संशोधित करना है जो विकास की राह में बाधा बनते हैं। प्रधानमंत्री के अनुसार, अब छोटी-मोटी तकनीकी भूलों के लिए जेल जाने का डर खत्म होगा, जिससे उद्यमियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और देश में निवेश के लिए बेहतर माहौल तैयार होगा।

उन्होंने इसे 'सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास' के मंत्र का विस्तार बताया।

​42 कानूनों में बदलाव और जेल की जगह जुर्माने का प्रावधान 
इस विधेयक के माध्यम से पर्यावरण, कृषि, मीडिया, उद्योग और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़े 42 कानूनों में संशोधन किया जाएगा।

नए प्रावधानों के तहत कई ऐसे अपराध, जिनमें पहले जेल की सजा का प्रावधान था, उन्हें अब केवल जुर्माने तक सीमित कर दिया गया है। उदाहरण के तौर पर, पोस्ट ऑफिस एक्ट, ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट और कॉपीराइट एक्ट जैसे कानूनों में बड़े फेरबदल किए गए हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस बिल का स्वागत करते हुए कहा कि यह औपनिवेशिक मानसिकता वाले उन बोझिल कानूनों से मुक्ति दिलाने का प्रयास है, जो दशकों से भारतीय नागरिकों को परेशान कर रहे थे।

​उद्यमियों को मिलेगी राहत और प्रशासनिक जवाबदेही होगी तय 
जन विश्वास बिल के पारित होने से सबसे बड़ी राहत उन छोटे और मध्यम स्तर के उद्यमियों (MSME) को मिलेगी, जो अक्सर कागजी कार्यवाहियों और तकनीकी खामियों के कारण कानूनी पचड़ों में फंस जाते थे।

विधेयक में न केवल दंड कम करने का प्रावधान है, बल्कि हर तीन साल में जुर्माने की राशि में 10 प्रतिशत की वृद्धि का भी सुझाव दिया गया है ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कानून से प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ेगी और भ्रष्टाचार के अवसरों में कमी आएगी।

राज्यसभा में पारित होने के बाद अब इसे देश के आर्थिक और सामाजिक ढांचे में एक बड़े सुधारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है।

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