West Bengal Polls 2026: पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों की सुगबुगाहट के बीच भारतीय निर्वाचन आयोग ने अपनी ताकत का अहसास कराते हुए राज्य प्रशासन में भारी फेरबदल किया है।
आयोग ने पिछले 15 दिनों के भीतर विभिन्न विभागों और पुलिस प्रशासन के कुल 483 अधिकारियों के तबादले के आदेश जारी किए हैं। इनमें जिला स्तर के अधिकारियों से लेकर पुलिस महकमे के रसूखदार नाम भी शामिल हैं।
आयोग का यह कदम राज्य में स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। तबादले की इस सूची में उन अधिकारियों को प्राथमिकता दी गई है जो लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे हुए थे या जिनकी निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे थे।
निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए 'क्लीनअप' अभियान
निर्वाचन आयोग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार का राजनीतिक हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विपक्षी दलों द्वारा की गई शिकायतों और आयोग के अपने आंतरिक फीडबैक के आधार पर इन अधिकारियों की सूची तैयार की गई थी।
आयोग की गाइडलाइंस के मुताबिक, उन अधिकारियों को तुरंत हटाया गया है जो पिछले तीन वर्षों से अधिक समय से एक ही जिले में कार्यरत थे। इस 'क्लीनअप' अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्थानीय स्तर पर पुलिस और नागरिक प्रशासन पूरी तरह तटस्थ होकर काम करें और मतदाताओं में सुरक्षा का भाव पैदा हो।
राजनीतिक गलियारों में हलचल और विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया
एक साथ इतने बड़े पैमाने पर हुए तबादलों ने बंगाल की राजनीति में उबाल ला दिया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और अन्य विपक्षी दलों ने आयोग के इस फैसले का स्वागत किया है, उनका कहना है कि बंगाल में हिंसा मुक्त चुनाव के लिए ऐसे कड़े कदम उठाना अनिवार्य था।
दूसरी ओर, सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने इसे केंद्र के इशारे पर की गई कार्रवाई बताते हुए सवाल उठाए हैं। हालांकि, संवैधानिक विशेषज्ञों का कहना है कि चुनाव के समय प्रशासन की कमान आयोग के पास होती है और यह रूटीन प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन इस बार तबादलों की संख्या और तेजी ने सबको चौंका दिया है।
सुरक्षा व्यवस्था और आने वाले दिनों में और भी कड़े फैसले
483 अधिकारियों के तबादले के बाद अब नई तैनातियों पर भी आयोग की पैनी नजर है। स्थानांतरित किए गए अधिकारियों के स्थान पर उन लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है जिनका रिकॉर्ड बेदाग रहा है।
आयोग ने यह भी संकेत दिया है कि यदि किसी भी अधिकारी की कार्यप्रणाली में पक्षपात की सूचना मिली, तो चुनाव के दौरान उन पर और भी कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
इसके साथ ही, संवेदनशील बूथों की मैपिंग और अर्धसैनिक बलों की तैनाती को लेकर भी आयोग ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के साथ ही अब सबकी नजरें प्रशासन के अगले कदमों पर टिकी हैं।










