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हमेशा हेल्दी और एनर्जेटिक है रहना, तो अपनाएं ये खास योगासन

जब आप नियमित योगाभ्यास करती हैं तो तन-मन स्वस्थ रहते हैं। अगर आप योगाभ्यास में अपने पार्टनर को भी शामिल कर लें तो इससे दोनों स्वस्थ भी रहेंगे और आपका आपसी तालमेल भी बेहतर होगा।

हमेशा हेल्दी और एनर्जेटिक है रहना, तो अपनाएं ये खास योगासन

जब आप नियमित योगाभ्यास करती हैं तो तन-मन स्वस्थ रहते हैं। अगर आप योगाभ्यास में अपने पार्टनर को भी शामिल कर लें तो इससे दोनों स्वस्थ भी रहेंगे और आपका आपसी तालमेल भी बेहतर होगा।

योगाभ्यास सिर्फ अकेले ही नहीं, यह समूह में या किसी दूसरे व्यक्ति के साथ मिलकर भी किया जाता है। अगर आप चाहती हैं कि आपके साथ-साथ आपका पार्टनर भी फिट रहे तो साथ में मिलकर योगाभ्यास करें। इन दिनों कपल योगा खूब चलन में भी हैं। इसमें कोई अलग आसन नहीं करने होते हैं, बस साथ मिलकर सामान्य आसनों का ही अभ्यास करना होता है।

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1.वृक्षासन

वृक्षासन को ट्री पोज भी कहा जाता है। यह एक ऐसा आसन है, जिसमें व्यक्ति को एक पैर पर खड़े होकर खुद को बैलेंस करना होता है। बहुत से लोगों के लिए अधिक देर तक वृक्षासन में होल्ड कर पाना मुश्किल होता है। ऐसे में आप और आपका पार्टनर एक-दूसरे के नजदीक बने रहकर इस आसन को बैलेंस कर सकते हैं।

2.नौकासन

बोट पोज के नाम से जाना जाने वाला नौकासन पाचन क्रिया के लिए बहुत लाभदायक है। इस आसन को करने के लिए पहले पीठ के बल लेट जाएं और फिर धीरे-धीरे ऊपर उठते हुए अपने शरीर से 30 डिग्री का कोण बनाएं। इस स्थिति में जितनी देर तक रुकते हैं, उतना ही अधिक फायदा होता है। लेकिन आमतौर पर अधिक देर तक होल्ड कर पाना संभव नहीं हो पाता।

ऐसे में कपल्स एक-दूसरे के सामने नौकासन करते हुए एक-दूसरे का हाथ पकड़े, इससे आसन ज्यादा देर तक होल्ड कर पाएंगे। लेकिन साथ में जब आसन करें तो नौकासन में 45 डिग्री का कोण बनाएं।

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3.सुखासन

प्राणायाम करते समय अमूमन सबसे पहले सुखासन में बैठा जाता है, लेकिन अकसर देखने में आता है कि कुछ ही देर में पीठ झुकने लगती है और पॉश्चर गलत हो जाता है, जिससे प्राणायाम का उतना लाभ नहीं मिलता, जितना कि वास्तव में मिलना चाहिए। ऐसे में आप दोनों पार्टनर एक-दूसरे से अपनी पीठ लगाकर सुखासन का अभ्यास करें।

इससे आपकी पीठ सीधी रहेगी और आपका पॉश्चर सही होगा। इसके अलावा इस आसन को एक साथ करने का दूसरा लाभ यह होता है कि जब आप दोनों एक-दूसरे से पीठ लगाकर बैठते हैं तो आस-पास एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, इससे भी आपको बहुत फायदा होता है।

4.उष्ट्रासन

उष्ट्रासन भी अगर पार्टनर के साथ मिलकर किया जाए तो यह बेहद आसान और प्रभावी हो जाता है। उष्ट्रासन करने के लिए सबसे पहले वज्रासन में बैठें। अब पीछे की तरफ से अपने पंजों को हाथों की मदद से पकड़कर अपने शरीर को ऊपर उठाने का प्रयास करें। याद रखें कि आपके घुटने जमीन पर ही हों, साथ ही आपकी कमर मुड़ी हो और आप आकाश की ओर देख रहे हों।

इस आसन में पैरों पर भी काफी स्ट्रेच आता है लेकिन अगर दोनों पार्टनर आमने-सामने आपस में पैर मिलाते हुए इस आसन का अभ्यास करें तो इससे पैरों को हल्का सपोर्ट मिलता है और इस स्थिति में काफी देर तक ठहरा जा सकता है।

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