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Happy Father's Day 2019 : बेटियों ने बयां किए पिता से जुड़े अहसास

पिता अपनी बेटी को अंगुली पकड़ कर चलना तो सिखाते ही हैं, उसके सपनों को पंख भी देते हैं। जब भी जिंदगी में मुश्किल आती है तो हौसला देते हैं, संबल बनते हैं। अपनी बेटी की खुशियों के लिए हर संभव प्रयास करते हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में कार्यरत कुछ बेटियां बयां कर रही हैं अपने पिता से जुड़े अहसास।

Happy Father

पिता अपनी बेटी को अंगुली पकड़ कर चलना तो सिखाते ही हैं, उसके सपनों को पंख भी देते हैं। जब भी जिंदगी में मुश्किल आती है तो हौसला देते हैं, संबल बनते हैं। अपनी बेटी की खुशियों के लिए हर संभव प्रयास करते हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में कार्यरत कुछ बेटियां बयां कर रही हैं अपने पिता से जुड़े अहसास।

पापा ने बंधाया हौसला

मंजुला, शिक्षिका

(कोरबा-छत्तीसगढ़)

मेरा शुरू से ही जॉब करने का मन था लेकिन बेटी को पालने के साथ जॉब करने के बारे में सोचने की हिम्मत ही नहीं होती थी। जब बेटी के ही स्कूल में मुझे जॉब ऑफर हुई तो पहले तो बहुत खुशी हुई, लेकिन जैसे-जैसे ज्वॉइनिंग की डेट पास आने लगी, मेरी हिम्मत जवाब देने लगी। कैसे तालमेल बिठा पाऊंगी? घर और नौकरी के बीच बहुत उलझन में थी मैं। लेकिन पापा बिना कहे ही मेरी परेशानी समझ गए और मुझे समझाया कि जहां चाह, वहां राह निकल ही आती है। पापा ने कहा कि उन्हें यकीन है कि मैं बहुत अच्छे से दोनों जिम्मेदारी निभा पाऊंगी। इस तरह पापा ने हौसला बंधाया। उनका विश्वास सही साबित हुआ। आज मुझे जॉब करते हुए पांव साल हो गए हैं। मैंने घर की जिम्मेदारी और जॉब दोनों को अच्छे से संभाला हुआ है।

जिंदगी कभी डगमगाने नहीं दी

भारती वशिष्ठ, बैंक ऑफिसर

(सोनीपत-हरियाणा)

मैं अपने पापा को पिताश्री कहती हूं। उन्होंने हमेशा एक स्तंभ की तरह मुझे सहारा देकर जिंदगी में डगमगाने नहीं दिया। वह आज भी खुशियों को चुन-चुन कर मेरी झोली में भरते रहते हैं। मुसीबतों के सामने खड़े होकर अहसास दिलाते हैं कि एक पिता हमेशा अपने बच्चों के लिए सुपरहीरो ही रहते हैं। उनके दिए संस्कार और उसूल जिंदगी और नौकरी की परेशानियों को भी बौना कर देते हैं। जब अपने नाती-पोती के साथ उन्हें बचपन जीता देखती हूं तो बहुत खुशी मिलती है। ये मेरे पिता की दी हुई शिक्षा, संस्कार ही है कि आज कोई भी कठिन परिस्थिति हो, मैं कभी हार नहीं मानती।

बहुत मजबूत होकर निभाया साथ

श्वेता आचार्य, असिस्टेंट प्रोफेसर

(मुंबई-महाराष्ट्र)

मेरे पापा ने ही मुझे श्वेता नाम दिया है। बचपन से ही मैंने पापा को अपने बच्चों के साथ हमेशा खड़े होते देखा है। आज अपने गृहस्थ जीवन में यही बात मैं भी अपनाने की कोशिश करती हूं। उन्होंने एक पिता होने का कर्तव्य उस वक़्त निभाया, जब बात समाज और अपने बच्चे की जिंदगी में से किसी एक को चुनने की थी। हां, वही समाज जहां वो एक प्रतिष्ठित व्यवसायी का रुतबा रखते हैं। बात तब की है, जब मेरी सगाई हुई और कुछ दिन में मुझे लगने लगा कि लड़के में कुछ गलत है। हमारे घर मे कभी कोई सगाई नहीं टूटी थी। जैसे-तैसे मैंने हिम्मत करके घर में सबको बताया। मां, भाई, बहन सबका यही कहना था छोटी-मोटी बात है, शादी के बाद सब ठीक हो जाता है। ऐसे सगाई तोड़ देने से तो पूरे परिवार का नाम खराब हो जाएगा लेकिन पापा ने किसी की परवाह ना करते हुए मेरे सर पर हाथ रखा और कहा 'तेरा मन क्या कहता है?' मेरी खामोशी से ही वो मेरा मन समझ गए। शादी में कुछ दिन ही बाकी थे लेकिन उन्होंने पूरे परिवार को समझाया, कई लोगों की नाराजगी भी बर्दाश्त की, लेकिन अपनी बेटी के साथ खड़े रहे। सबको मनाने का काम बहुत मुश्किल था, लेकिन वह अपनी बेटी को जिंदगी भर का दुख नहीं देना चाहते थे। बहुत नम्रतापूर्वक उन्होंने लड़के वालों को फोन करके मना कर दिया। उनकी यही सोच मुझे प्रेरित करती है और जीवन में आने वाली हर परिस्थिति को शांत और सशक्त होकर उसका सामना करना सिखाती है। मुझे गर्व है कि मैं अपने पापा की बेटी हूं।

हमेशा जिंदगी में आगे बढ़ना सिखाया

वर्षा मुणोत, सॉफ्टवेयर इंजीनियर

(सागर-मध्यप्रदेश)

हर कोई कहता है कि मां ही एक लड़की की सबसे अच्छी साथी होती है लेकिन मां के हमारी जिंदगी में आने की वजह भी तो पापा हैं। पापा ने मुझे हमेशा जिंदगी में आगे बढ़ना सिखाया। हमेशा कहा कि अगर तुम में आगे बढ़ने का जज्बा है तो कोई तुम्हें नहीं रोक सकता। मुश्किल आएगी लेकिन हार नहीं मानना उनका डटकर सामना करना है, फिर जीत जरूर मिलेगी। बचपन में अगर पैसों से संबंधित किसी भी तरह की दिक्कत का सामना करना पड़ा तो पापा ने उसका असर कभी भी हमारी पढ़ाई पर नही पड़ने दिया। मां के जाने के बाद भी उन्होंने हमारी अच्छे से देखभाल की। आज मैं अकेले अपने दम पर शहर से बाहर रहकर जॉब करती हूं। यह आत्मविश्वास और भरोसा पापा की वजह से ही मुझमें आया है। अपने पापा पर मुझे गर्व है ।

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