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खुश रहने के तरीके : बस करें ये छोटा सा काम

हमारा जीवन विचारों और भावनाओं का दर्पण है, जैसे विचार, भावनाएं होंगी, वैसा ही जीवन हम जी पाएंगे। ऐसे में जरूरी है कि सकारात्मक-खुशहाल जीवन के लिए अपनी भावनाओं और विचारों को स्वच्छ रखें। यकीन मानिए, ऐसा करना मुश्किल भी नहीं है।

खुश रहने के तरीके : बस करें ये छोटा सा काम
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Khush Rehne ke Tarike : हमारा जीवन विचारों और भावनाओं का दर्पण है, जैसे विचार, भावनाएं होंगी, वैसा ही जीवन हम जी पाएंगे। ऐसे में जरूरी है कि सकारात्मक-खुशहाल जीवन के लिए अपनी भावनाओं और विचारों को स्वच्छ रखें। यकीन मानिए, ऐसा करना मुश्किल भी नहीं है। जिस तरह विषाक्त भोजन हमारे स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है, ठीक उसी तरह बुरे विचार, भावनाएं, अनुभव और उनका प्रभाव मानसिक और भावनात्मक रूप से हमारी ऊर्जा को नष्ट करते हैं। ऐसे में जरूरी है कि हम अपने विचार, भावनाएं सकारात्मक रखें। तभी खुशहाल जीवन जीकर, मन को अतीत और भविष्य में भटकाए बिना जीवनपथ पर आगे बढ़ पाएंगे।

भावनात्मक स्वच्छता

हमारे पुराने दुख, गुस्सा जैसी भावनाएं हमारे भीतर एक जाल बुनती रहती है और कैंसर, ट्यूमर और मधुमेह जैसी लाइलाज बीमारियों की वजह बनती है। ऐसा ना हो इसके लिए भावनात्मक सफाई जरूरी है। यह भावनात्मक सफाई हमारे शारीरिक स्वास्थ्य में भी बदलाव लेकर आती है। हम अपनी मनोभावनाओं पर नियंत्रण कर पाते हैं। इसके अलावा गुस्से को दबाने की बजाय उसे स्वीकार करें और उसका अनुभव करते हुए उसे धीरे-धीरे अपने आपसे होकर जाने दें। अगर आपको किसी से कोई समस्या है तो खुलकर कहें। अपनी भावनाओं को अवरुद्ध न करें। भावनात्मक स्वच्छता आपको एक अच्छी भावना से ओत-प्रोत करती है।

मानसिक शुद्धता

अकसर हम व्यर्थ की चीजों के विषय में बार-बार सोचकर अपनी सकारात्मक ऊर्जा का एक बड़ा हिस्सा खर्च कर डालते हैं, जिससे हमारा मस्तिष्क सोचने के एक निश्चित स्वरूप में ही बंध जाता है। ऐसी सोच मस्तिष्क को नए विचारों और सुझावों को स्वीकार करने से रोकने लगता है। इस स्थिति से बचने के लिए मानसिक शुद्धता जरूरी है। ऐसी शुद्धता या सफाई वास्तव में चीजों को अपने आप होने देने के सिद्धांत के साथ जुड़ी है। मानसिक सफाई द्वारा हर बात के प्रति मन उन्मुक्त होते हुए भी उनसे संबद्ध नहीं रहता। मन को साफ करने में विचारों को स्वतंत्र छोड़ना, वर्तमान में जीना, नई चीजों का अभ्यास करना, विचारों को बदलने जैसी बातों का सहारा लेना होता है।

बाहरी स्वच्छता भी जरूरी

हमारा घर और कार्यस्थल हमारी मानसिक, भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक और व्यक्तिगत रूपरेखा का प्रतिबिंब होता है। कार्यस्थल पर किसी भी कर्मचारी का अस्त-व्यस्त वर्कस्टेशन उसकी अव्यवस्था का परिचायक होता है। इसलिए यह जरूरी है कि खुद को, घर को, ऑफिस डेस्क को हमेशा साफ रखें। गैजेट्स की साफ-सफाई करें, ई-मेल और एसएमएस में नई मेल के लिए जगह बनाएं। अपने फोन की मेमोरी में जगह घेरने वाले सैंकड़ों फोन नंबर, कंप्यूटर की हार्ड डिस्क में अनावश्यक सूचनाओं की लोडिंग कम करें। फेंग्शुई के अनुसार भी साफ-सफाई किसी क्षेत्र में निष्क्रिय पड़ी ऊर्जा को कार्यान्वित करते हुए ना केवल उस नकारात्मक अवरोधों को बाहर करती है बल्कि वहां समृद्धि, स्वास्थ्य, शांति और खुशियों के आने का भी स्वागत करती है।

-दिव्यज्योति 'नंदन'

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