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कई प्रकार की बीमारियों का कारण है हाई ब्लड प्रेशर, जानिए बचाव के उपाय

हमारे शरीर के शरीर में रक्त संचार के लिए रक्त का एक निश्चित दबाव जरूरी होता है

कई प्रकार की बीमारियों का कारण है हाई ब्लड प्रेशर, जानिए बचाव के उपाय
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नई दिल्ली. मनुष्य का हृदय फोर्स के साथ रक्त को महाधमनियों में पहुंचाता है, जिससे धमनियों में रक्त का एक दबाव बनता है और उसी दबाव को ब्लड प्रैशर कहते हैं । हमारे शरीर के शरीर में रक्त संचार के लिए रक्त का एक निश्चित दबाव जरूरी होता है और जब यह दबाव बढ़ जाता है तो शरीर की बारीक रक्त वाहनियों में सिकुडऩ या संकरापन आ जाता है और इसी का परिणाम होता है हाई ब्लड प्रैशर। हमारे शरीर की प्रत्येक कोशिका का पोषण एवं ऑक्सीजन की आर्पित धमनियों के जरिए प्रवाहित होने वाले रक्त के जरिए होती है और इन महाधमनियों में रक्त पहुंचाने का कार्य हृदय करता है ।
विशेषज्ञों के अनुसार अगर इसे कंट्रोल न किया जाए तो धीरे-धीरे यह बढ़ जाता है जिससे बाद में हार्ट अटैक, ब्रेन हैमरेज, किडनी फेल होने जैसी कई गंभीर बीमारियों की संभावना बढ़ जाती हैं । हाई ब्लड प्रैशर (हाइपरटैंशन) को साइलैंट किलर इसलिए कहा जाता है क्योंकि शुरू में इस बीमारी के कोई खास लक्षण नहीं होते और आमतौर पर जब कोई व्यक्ति किसी अन्य बीमारी के कारण डाक्टर के पास जाता है तो जांच में पता चलता है कि उसे हाई ब्लड प्रैशर की समस्या है ।
इस बीमारी के बारे में लोगों को जागरूक करने हेतु हर वर्ष 17 मई को वर्ल्ड हाइपरटैंशन-डे (विश्व उच्च रक्तचाप दिवस) मनाया जाता है । डॉक्टरों का मानना है कि जीवनशैली ठीक न होना एवं तनाव जहां हाई ब्लड प्रैशर के सबसे मुख्य कारण हैं, वहीं घर में खान-पान का ध्यान न रखने पर, मोटापे, शूगर, नमक एवं शराब के ज्यादा सेवन से भी हाई ब्लड प्रैशर हो जाता है ।
डॉक्टरों की सलाह
समय-समय पर ब्लड प्रैशर अवश्य चैक करवाना चाहिए । क्योंकि जब तक हाई ब्लड प्रैशर का पता चलता है, तब तक इसका सीधा असर किडनियों पर हो चुका होता है । नासा न्यूरो केयर के न्यूरोलॉजिस्ट डा. संदीप गोयल ने बताया कि कई केसों में अधरंग, ब्रेन हैमरेज व दिमाग की अन्य कई बीमारियों का कारण हाई ब्लड प्रैशर होता है । उन्होंने बताया कि व्यक्ति अगर अपना ब्लड प्रैशर नियंत्रण में रखे तो वह इनसे बच सकता है ।
हाई ब्लड प्रैशर से बचाव हेतु उपाय।
-खाने में नमक का इस्तेमाल कम करें।
-नियमित रूप से सैर एवं व्यायाम करें।
-मोटापा घटाएं ।
-शूगर पर रखें कंट्रोल ।
-धूम्रपान न करें।
-शराब का ज्यादा सेवन न करें।
-समय-समय पर डाक्टर से परामर्श लें।
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