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भारी-भरकम स्कूल बैग आपके बच्चे को रोज कर रहा है बीमार, जानें कैसे

बच्चों के हैवी स्कूल बैग्स की वजह से उन्हें कई तरह की शारीरिक समस्याएं हो रही हैं। उनके उठने-बैठने से लेकर चलने-फिरने का ढंग भी प्रभावित हो रहा है। ऐसे में पैरेंट्स को चाहिए कि वे इस बारे में जरूरी बातों का ध्यान रखें।

भारी-भरकम स्कूल बैग आपके बच्चे को रोज कर रहा है बीमार, जानें कैसे

बच्चों के हैवी स्कूल बैग्स की वजह से उन्हें कई तरह की शारीरिक समस्याएं हो रही हैं। उनके उठने-बैठने से लेकर चलने-फिरने का ढंग भी प्रभावित हो रहा है। ऐसे में पैरेंट्स को चाहिए कि वे इस बारे में जरूरी बातों का ध्यान रखें। इस बारे में क्यूआरजी हेल्थ सिटी हॉस्पिटल, फरीदाबाद के सीनियर पीडियाट्रिक्स डॉ. लोकेश महाजन पूरी जानकारी दे रहे हैं।

इन दिनों बच्चों के स्कूल बैग्स काफी हैवी होने लगे हैं। बैग के बोझ के कारण बच्चों को कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, जैसे स्पॉनडिलाइटिस, झुकी हुई कमर और पोस्चर की समस्या।

स्कूल जाने वाले लगभग 30 प्रतिशत बच्चे कमर दर्द की शिकायत करते हैं, जिससे बच्चों में पोस्चर संबंधी प्रॉब्लम बढ़ जाती है। इस वजह से वे झुककर बैठते हैं और उनका पोस्चर खराब हो जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बच्चे नियमित रूप से अपने वजन का 10 प्रतिशत से अधिक बोझ कंधे पर उठाएंगे, तो इससे उनको काफी नुकसान हो सकता है। एक सर्वे के अनुसार स्कूली छात्र अपने वजन का 20-25 प्रतिशत तक वजन उठा रहे हैं।

इतना ही नहीं भारी बैग उठाने का बच्चों पर भावनात्माक प्रभाव भी पड़ता है। मनोवैज्ञानिकों की मानें तो भारी बैग उठाने की वजह से बच्चों में तनाव होने लगता है, जिस वजह से उनमें पढ़ाई के प्रति रुचि घट जाती है। ऐसे में पैरेंट्स का दायित्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है।

प्रमुख समस्याएं

  • कमर, गर्दन और कंधों में दर्द
  • हाथों में झुनझुनी आना, सुन्न हो जाना और कमजोरी आना।
  • थकान और गलत पोस्चर विकसित होना।

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  • गर्दन और कंधों में तनाव के कारण सिरदर्द होना।
  • स्पाइन का क्षतिग्रस्त हो जाना।
  • स्कोलियोसिस यानी स्पाइन का एक ओर झुक जाना।
  • फेफड़ों पर दबाव आने के कारण सांस लेने की क्षमता कम हो जाना।

बचाव के उपाय

  • बच्चे के लिए ऐसे स्कूल बैग खरीदें, जिसके शोल्डर स्ट्रैप्स पैड वाले हों। इससे गर्दन और कंधों के क्षेत्र पर दबाव कम पड़ता है।
  • बैग को लटकाने के बाद अपने बच्चे का पोस्चर चेक करें।
  • अगर ऐसा लगे कि आपका बच्चा आगे की ओर झुक रहा है या उसकी कमर झुक रही है तो इसका मतलब है कि बैग ज्यादा भारी हो गया है या फिर उसे प्रॉपर तरीके से कैरी नहीं किया गया है।
  • यह सुनिश्चित करें कि बच्चा टाइम टेबल के हिसाब से ही किताबें ले जाए।
  • अनावश्यक किताबें और चीजें बच्चों के बैग से निकाल बाहर करें।
  • बच्चों में बचपन से ही एक्सरसाइज और योग करने की आदत डालें ताकि वो शारीरिक रूप से फिट और एक्टिव रहें।

पैरेंट्स-टीचर्स करें प्रयास

  • पैरेंट्स सिर्फ अपने स्तर पर ही बच्चों के हैवी स्कूल बैग्स को लेकर अलर्ट न रहें, टीचर्स को भी इस संबंध में जागरूक होने को कहें।
  • तभी बच्चों की हैवी स्कूल बैग से जुड़ी समस्याओं को कम किया जा सकेगा।
  • बच्चों के बैग में कम से कम किताबें हों ताकि उनका बैग हल्का हो सके।
  • स्कूल प्रबंधन क्लास में बच्चों के लिए लॉकर बनवा सकते हैं ताकि बच्चे अपनी पुस्तकें और दूसरी चीजें रख सकें, जिनकी जरूरत सिर्फ क्लास रूम में होती है।
  • बच्चों के पास सिर्फ एक ही नोटबुक हो, जिसमें अलग-अलग सेक्शन बनाकर बच्चा अलग-अलग विषयों के काम कर सकता है।
  • इससे उसके पास सभी विषयों के लिए केवल एक ही नोटबुक होगी और उसका बैग हल्का हो जाएगा।
  • शिक्षक हर नए पीरियड की शुरुआत में दो मिनट के लिए बच्चों से वॉर्मअप एक्सरासइज कराएं।
  • ऐसा करने से बच्चे एक्टिव, एनर्जेटिक रहेंगे और लंबे समय तक एक ही पोस्चर में बैठे रहने से बच जाएंगे।
  • हर क्लास के लिए फिजिकल एक्टिविटी अनिवार्य की जानी चाहिए।
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