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योगासन के फायदे : इन तीन आसनों से खुद को बनाएं हेल्दी एंड फिट

Yogasan Benefits: नियमित योगाभ्यास स्वस्थ रहने का अचूक उपाय है। यह शारीरिक ही नहीं मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बहुत लाभदायक है। जानिए, किस तरह के योगाभ्यास मानसिक-शारीरिक स्वास्थ्य के लिए कारगर हैं। इसलिए आज हम आपको स्वस्थ रहने के लिए योगासन के फायदे (Yogasan Benefits) बता रहे हैं।

योगासन के फायदे :  इन तीन आसनों से खुद को बनाएं हेल्दी एंड फिट
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Yogasan Benefits : आज भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अपने शारीरिक, मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दे पाते हैं। यह लापरवाही आगे चलकर कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम की वजह बनती है, हम बीमार रहने लगते हैं। लेकिन इन समस्याओं से बचा जा सकता है। अगर सही खान-पान के साथ नियमित योगाभ्यास भी किया जाए। इससे न सिर्फ शारीरिक रूप से स्वस्थ रहते हैं, हमारा मानसिक स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा।

कपालभाति प्रणायाम

कपालभाति का अभ्यास करने के लिए आप सिद्धासन, पद्मासन, वज्रासन या ध्यान मुद्रा में बैठें। अपने शरीर को ढीला छोड़ दें और सांस को बाहर की तरफ बार-बार छोड़ें। इस अवस्था में आपका पेट अंदर की तरफ जाएगा। ध्यान रखें कि कपालभाति में सांस को अंदर नहीं खींचा जाता, बस बाहर की तरफ छोड़ा जाता है। आप इस अभ्यास को लगातार 30 से 40 बार करने की कोशिश करें। इसके बाद धीरे-धीरे इसकी गिनती और समय बढ़ाएं।




अनुलोम-विलोम

अनुलोम विलोम करने के लिए सबसे पहले पद्मासन, सिद्धासन या सुखासन में बैठ जाएं। अब दाएं हाथ के अंगूठे से नासिका के दाएं छिद्र को बंद कर लें और नासिका के बाएं छिद्र से 4 तक की गिनती में सांस को भरें और फिर बायीं नासिका को अंगूठे के बगल वाली दो अंगुलियों से बंद कर दें। उसके बाद दाहिनी नासिका से अंगूठे को हटा दें और दायीं नासिका से सांस को बाहर निकालें। अब दायीं नासिका से ही सांस को 4 तक की गिनती तक भरें और दायीं नासिका को बंद करके बायीं नासिका खोलकर सांस को 8 की गिनती में बाहर निकालें। इस प्राणायाम को 5 से 15 मिनट तक कर सकती हैं।




भ्रामरी प्रणायाम

भ्रामरी प्रणायाम को करने के लिए सबसे पहले एक साफ और समतल जगह पर चटाई बिछाकर उस पर पद्मासन या सुखासन की अवस्था में बैठ जाएं। अब अपने दोनों हाथों को ऊपर उठाकर अपने कंधों के समांतर ले जाएं। इसके बाद दोनों हाथों को कोहनियों से मोड़कर कानों के पास लाएं। अब अपने दोनों हाथों के अंगूठों से दोनों कानों को बंद कर लें। दोनों हाथों की तर्जनी अंगुली को माथे पर और मध्यमा, अनामिका, कनिष्ठिका अंगुली को आंखों के ऊपर रखें। मुंह बिल्कुल बंद रखें और अपने नाक के माध्यम से सामान्य गति से सांस अंदर लें। फिर नाक के माध्यम से ही मधुमक्खी के गुनगुनाने की ध्वनि के साथ सांस बाहर निकालें। ध्यान रहे कि सांस बाहर निकालते हुए 'ॐ' का उच्चारण करें। अब इस क्रिया को 5-7 बार दोहराएं। तनाव कम करने और मानसिक तनाव से मुक्ति पाने के लिए भ्रामरी प्राणायाम बहुत ही लाभदायक होता है।

लेखिका - मिताली जैन

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