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लड़कियों में मां से आती हैं ये 5 बीमारियां

आपने अक्सर बच्चों को पेरेंट्स से विरासत में जमीन जायदाद और संपत्ति मिलते हुए देखा होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बच्चों को माता पिता से बीमारियां भी विरासत में मिलती हैं। ये बात सौ फीसदी सच है, इन बीमारियों को आनुवांशिक बीमारी कहा जाता है। आमतौर पर डायबिटीज, ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं लोगों को पैतृक रुप से मिलती हैं। ऐसे में आज हम आपको उन बीमारियों के बारे में बता रहे हैं जो लड़कियों में उनकी मां से आती हैं।

लड़कियों में मां से आती हैं ये 5 बीमारियांलड़कियों में मां से आती हैं ये 5 बीमारियां

लंदन विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर रिसर्च के मुताबिक, 57 फीसदी लड़कियों में जल्दी पीरियड्स शुरु होना, मां से आनुवांशिक रुप से मिले गुणों की वजह से होता है। इस शोध में इसके अलावा अन्य बीमारियों के बारे में भी बताया गया है जो लड़कियों को उनकी मां से आनुवांशिक यानि जेनेटिक जीन्स के कारण पहुंचती हैं। आइए जानते हैं उन बीमारियों के बारे में...

मां से लड़कियों में पहुंचने वाली बीमारियां


1. ब्रेस्ट कैंसर

वैसे तो हर महिला को 40 साल की उम्र के बाद ब्रेस्ट कैंसर टेस्ट यानि मैमोग्राम जरुर करवाना चाहिए। इसके अलावा अगर आपकी परिवार की महिलाओं में से किसी को ब्रेस्ट कैंसर की समस्या रही है, तो ऐसे में उस परिवार की प्रत्येक लड़की को ब्रेस्ट कैंसर संबंधी लाइफ में एक बार जरुर करवानी चाहिए, उत्परिवर्तित जीन बीआरसीए 1 या बीआरसीए 2 वाला दोषपूर्ण जीन शरीर में होने पर ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। ृक्योंकि ज्यादातर महिलाओं में कम उम्र में ब्रेस्ट कैंसर विकसित होता है।

2. अल्जाइमर

अल्जाइमर, एक मानसिक विकार है, इससे पीड़ित व्यक्ति चीजों को बार-बार भूलने की समस्या से गुजरता है। अगर आपकी मां या परिवार की कोई महिला अल्जाइमर नामक बीमारी से पीड़ित रही हैं, तो ऐसे में उस घर की लड़कियों में इस बीमारी के होने की संभावना 30-50 फीसदी तक बढ़ जाती है। इसके अलावा आप इससे बचने के लिए हेल्दी लाइफ स्टाइल जीएं और वजन और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखकर बीमारी होने के खतरे को 20 फीसदी तक कम कर सकते हैं।


3. दिल की बीमारी

आज के दौर में अधिकांश लोग दिल की बीमारियों से पीड़ित हैं, ऐसे में आपको दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा 20 फीसदी तक बढ़ सकता है। ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में हुए एक शोध के मुताबिक, अगर आपकी मां को हर्ट स्ट्रोक और हर्ट अटैक की समस्या हुई है। तो ऐसे में लड़कियों में भी हर्ट रिलेटिड बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है। इसका मुख्य कारण वंशावुगत वैस्कुलर बीमारी से दिल में कोरोनरी धमनी के साथ मस्तिष्क की मस्तिष्क धमनी पर नकारात्मक प्रभान पड़ता है।

4. डिप्रेशन

आज के दौर में डिप्रेशन युवाओं में बहुत तेजी से पनप रहा है, इसके कारणों में जहां रिश्तों में बढ़ता तनाव, अविश्वास भूमिका निभाता है, उतना ही परिवार में मानसिक बीमारी का इतिहास भी, शोध के मुताबिक परिवार में पहले से डिप्रेशन होने से बच्चों में खासकर लड़कियों में इसके होने की संभावना 10 फीसदी बढ़ जाती है। इससे बचने के लिए पूरी नींद लेना, शराब का सेवन न करना आदि तनाव को कम करके डिप्रेशन होने के खतरे की आशंका को कम किया जा सकता है।


5. माइग्रेन

अगर आप भी लगातार सिरदर्द यानि माइग्रेन से पीड़ित हैं, तो ऐसे में पेरेंट्स से जानने की कोशिश करें कि आपके परिवार में पहले किसी को ये समस्या थी या नहीं। क्योंकि शोध के मुताबिक, माइग्रेन एक वंशानुगत होने वाली बीमारियों में से एक है। अगर आपके परिवार में इसकी फैमिली हिस्ट्री मौजूद है, तो ऐसे में आपको माइग्रेन होने का खतरा 70 से 80 फीसदी तक बढ़ जाता है। चॉकलेट, चीज़, कॉफ़ी, खट्टे फल और रेड वाइन जैसे संवेदनशील खाद्य पदार्थों का सेवन करना सामान्य माइग्रेन के ट्रिगर्स माने जाते हैं। इसके अलावा लड़कियों को समय समय पर हार्मोंन्स में होने वाले बदलावों का खास ख्याल रखना चाहिए, क्योंकि इससे पीरियड साइकल पर नकारात्मक असर पड़ता है।

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