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पुण्य तिथि: मोहम्मद रफी की पहली कमाई थी 50 रुपए, जानिए कैसा रहा इनका सफर

रफी साहब की जादुई आवाज को पहचानने और तराशने का श्रेय नौशाद साहब को जाता है।

पुण्य तिथि: मोहम्मद रफी की पहली कमाई थी 50 रुपए, जानिए कैसा रहा इनका सफर
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हिंदी फिल्मों के पार्श्व गायन में मोहम्मद रफी की कोई जगह नहीं ले सकता। प्यार-मोहब्बत हो या दर्द भरे नगमे, वह हर तरह के गीत गाते थे, उनकी गायकी में भाव ऐसे समाए रहते थे कि सुनने वाले उसी भाव में डूब जाते। रफी की आवाज का जादू एक अनोखी मिसाल है। मोहम्मद रफी की पुण्य तिथि पर उनसे जुड़ी यादें।

बात 1944 की है, जब मोहम्मद रफी, संगीतकार नौशाद साहब के नाम एक पत्र लेकर मुंबई आए थे। नौशाद ने इस पत्र का आदर किया और रफी की आवाज सुनी। रफी की आवाज सुनकर उन्हें लगा कि कोई फरिश्ता गा रहा है।

इसके बाद नौशाद ने रफी को हिंदी फिल्म ‘पहले आप में’ गवाया और इस गाने के लिए रफी को 50 रुपए मेहनताना दिया। इस तरह रफी का संगीत सफर शुरू हुआ। उन्हें पहली सफलता फिल्म ‘जुगनू’ के गीत ‘बदला यहां वफा का बेवफाई के सिवा क्या है’ से मिली।

इस गीत के बाद देखते ही देखते कोटला सुल्तान सिंह के फीकू, मोहम्मद रफी बन गए, इसमें संगीतकार नौशाद साहब का भी अहम योगदान रहा।

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ऐसे पहुंचे बुलंदी पर :

मोहम्मद रफी की आवाज 55-60 के दशक तक आते-आते हर तरफ गंूजने लगी। प्यार-मोहब्बत हो या दर्द भरे नगमे, रफी की आवाज से हर गीत नायाब बन जाता था। इन्हीं दिनों एक गीत ‘चौदहवीं का चांद हो या आफताब हो...’ उन्होंने गाया। इस गीत ने ऐसा गजब किया कि हर जवां दिल इसे गुनगुनाने लगा।

इस गीत के लिए पहली बार मोहम्मद रफी को फिल्मफेयर अवार्ड मिला। इसके बाद सन 1961 में रफी को अपना दूसरा फिल्मफेयर अवार्ड फिल्म ‘ससुराल’ के गीत ‘तेरी प्यारी प्यारी सूरत को...’ के लिए मिला।

1965 में लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के संगीत निर्देशन में फिल्म ‘दोस्ती’ के लिए गाए गीत ‘चाहूंगा मैं तुझे सांझ-सवेरे’ के लिए तीसरा फिल्मफेयर अवार्ड मिला। 1965 में उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से भी नवाजा गया।

1966 में फिल्म ‘सूरज’ के गीत ‘बहारों फूल बरसाओ...’ बहुत मशहूर हुआ और इसके लिए उन्हें चौथा फिल्मफेयर अवार्ड मिला। 1968 में शंकर जयकिशन के संगीत निर्देशन में फिल्म ‘ब्रह्मचारी’ के गीत ‘मैं गाऊं तुम सो जाओ...’ के लिए मोहम्मद रफी को पांचवां फिल्मफेयर अवार्ड मिला।

1977 में छठा और अंतिम फिल्मफेयर अवार्ड उन्हें ‘क्या हुआ तेरा वादा...’ गीत के लिए मिला।

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