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टीवी की दादीसा अपनी ऑन-स्क्रीन बहू के अधेड़ उम्र में प्रेग्नेंट होने पर बोली ''बधाई हो''

हिंदी थिएटर में एक पहचान बनाने के बाद सुरेखा सीकरी ने 1978 में फिल्म ‘किस्सा कुर्सी का’ से बॉलीवुड में कदम रखा था। उसके बाद ‘सलीम लंगड़े पर मत रो’, ‘जुबेदा’ में अभिनय कर उन्होंने खूब शोहरत बटोरी, लेकिन वह हमेशा लाइमलाइट से दूर रहीं।

टीवी की दादीसा अपनी ऑन-स्क्रीन बहू के अधेड़ उम्र में प्रेग्नेंट होने पर बोली

हिंदी थिएटर में एक पहचान बनाने के बाद सुरेखा सीकरी ने 1978 में फिल्म ‘किस्सा कुर्सी का’ से बॉलीवुड में कदम रखा था। उसके बाद ‘सलीम लंगड़े पर मत रो’, ‘जुबेदा’ के अलावा तमाम फिल्मों में अभिनय कर उन्होंने खूब शोहरत बटोरी, लेकिन वह हमेशा लाइमलाइट से दूर रहीं।

1988 में फिल्म ‘तमस’ और 1995 में ‘मम्मो’ के लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का नेशनल अवार्ड मिला।इसी बीच 1989 में उन्हें संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।

2006 के बाद वह किसी भी फिल्म में नजर नहीं आईं। दरअसल, सुरेखा सीकरी 2008 से 2016 तक टीवी सीरियल ‘बालिका वधू’ के पूरे 2245 एपिसोड में कल्याणी देवी उर्फ दादीसा के किरदार में लोगों का मन मोहती रहीं। अब वह फिल्म ‘बधाई हो’ में दादी के किरदार में हैं।

आप 2006 में फिल्म ‘हमको दीवाना कर गए’ में नजर आई थीं, अब 2018 में ‘बधाई हो’ में नजर आ रही हैं, फिल्मों में इतना गैप लेने की वजह?

2008 से 2016 तक मैं टीवी सीरियल ‘बालिका वधु’ में व्यस्त थी। हर माह 26 दिन हमें शूटिंग करनी पड़ती थी। ऐसे में फिल्मों के लिए समय नहीं मिला। बीच में अमोल गुप्ते के साथ एक बच्चों की फिल्म ‘स्निफ’ में छोटा-सा किरदार किया था।

लेकिन कहा जा रहा था कि सीरियल ‘बालिका वधु’ के बाद आपने खुद फिल्मों से दूरी बना ली थी?

ऐसा नहीं है कि मुझे फिल्में नहीं करनी हैं। मुझे फिल्में लगातार करनी हैं। लेकिन हम जिस उम्र के पड़ाव पर पहुंच गए हैं, उस उम्र की महिला कलाकारों के लिए अच्छे किरदार लिखे नहीं जाते।

लेकिन पिछले दो ढाई सालों में सिनेमा में तेजी से बदलाव हुआ है। अब लेखकों और निर्देशकों की एक नई जमीन तैयार हो रही है। ये वो लोग हैं, जो जमीन से जुड़े हुए हैं। इसी के चलते अब हमारी उम्र की महिला कलाकारों के लिए भी अच्छे किरदार लिखे जा रहे हैं।

इससे मेरी उम्मीदें बढ़ी हैं कि अब मेरे लिए भी किरदार लिखे जाएंगे। आने वाले समय में आप मुझे कई फिल्मों में अच्छे किरदार निभाते हुए देख सकेंगे, ऐसी उम्मीद है।

फिल्म ‘बधाई हो’ को लेकर क्या कहना चाहेंगी?

मनोरंजन से भरपूर इस फिल्म में एक सामाजिक मुद्दे को हल्के-फुल्के हास्य और मीठी बातों के साथ पेश किया गया है। फिल्म में जब कौशिक दंपती बड़ी उम्र में माता-पिता बनने की स्थिति में आते हैं तो घर के सदस्यों का क्या रिएक्शन होता है, इस पर फिल्म है।

दरअसल, फिल्म में कौशिक दंपती के शादी लायक बेटे को जब पता चलता है कि उसकी मां फिर से प्रेग्नेंट है तो उसे सामाजिक शर्मिंदगी होती है। इस तरह दादी का भी रिएक्शन होता है।

मध्यमवर्गीय परिवार के इर्द-गिर्द घूमने वाली यह मीठी-सी प्यारी-सी कहानी है। मैं इस फिल्म में दादी के ही किरदार में हूं। शुरुआत में मेरा किरदार अपनी बहू को अधेड़ उम्र में मां बनने को लेकर ताने देता है, लेकिन धीरे-धीरे वह इस बात का अहसास करती है कि इसमें कुछ भी गलत नहीं हुआ है। ऐसा होना स्वाभाविक है।

शहरी लोग अपने आपको मॉडर्न मानते हैं। तब अधेड़ उम्र में किसी औरत के फिर से मां बनने पर शर्मिंदगी क्यों होती है?

मेरी समझ से महानगरों के लोग इतना मॉडर्न नहीं हुए हैं, वे सिर्फ दिखावे की जिंदगी जीते हैं। बस पहनावे को लेकर जरूर मॉडर्न हो गए हैं। कुछ लोगों पर धीरे-धीरे पश्चिम का असर हो रहा है।

लेकिन यह रंग भी मध्यमवर्गीय लोगों में कम, उच्च वर्ग में ज्यादा है। हमारी फिल्म की कहानी में दिल्ली में रहने वाला मिडल क्लास परिवार ही है। फिल्म में एक अधेड़ उम्र की महिला के प्रेग्नेंट होने पर आस-पास के लोगों का, रिश्तेदारों का क्या रिएक्शन होता है।

फिल्म में वह बिल्कुल वैसे ही दिखाया गया है, जैसे असल जिंदगी में हो सकता है। कहने का मतलब है कि अधेड़ उम्र की महिला के मां बनने पर लोग ऐसा क्यों रिएक्ट करते हैं, यह आपको फिल्म में साफ नजर आ जाएगा।

क्या कोई दूसरी फिल्म कर रही हैं?

सच कहूं तो ‘बधाई हो’ के बाद कोई दूसरी फिल्म रिलीज होने के लिए अभी तैयार नहीं है। बीच में एक फिल्म की बातचीत चली थी, लेकिन उसका अंजाम अच्छा नहीं रहा।

इसी तरह दो सीरियलों की भी बातचीत चल रही है। लेकिन जब शूटिंग शुरू कर दूं, तब उसके बारे में बातचीत करना ठीक रहेगा। मुझे तो एक्टिंग करना अच्छा लगता है। मुझे काम करते हुए बड़ा मजा आता है।

कैमरे के आगे पहुंचते ही मेरे अंदर एक नई एनर्जी आ जाती है। सीरियल हो या फिल्म, हर जगह मैं पूरी मेहनत से काम करती हूं, हर किरदार को बेहतर तरीके से निभाती हूं।

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