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Sangeeta Ghosh Interview : अगर ऐसा हुआ तो जिंदगी जीने का मजा ही खो दूंगी

साल 2001 में आए सीरियल ‘देश में निकला होगा चांद’ में पम्मी का किरदार निभाकर छोटे पर्दे पर अपनी पहचान बनाने वाली संगीता घोष अपने एक्टिंग करियर में पहली बार सुपरनेचुरल सीरियल का हिस्सा बनने जा रही हैं। इस सीरियल का नाम ‘दिव्य दृष्टि’है। सीरियल में अपने किरदार और करियर से जुड़ी बातचीत संगीता घोष से।

Sangeeta Ghosh Interview : अगर ऐसा हुआ तो जिंदगी जीने का मजा ही खो दूंगी
संगीत घोष ने बतौर चाइल्ड एक्ट्रेस दस साल की उम्र में अपने करियर की शुरुआत सीरियल ‘हम हिंदुस्तानी’ से की थी। कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने ‘कुरुक्षेत्र’, ‘अधिकार’, ‘अजीब दास्तां’, ‘दरार’ जैसे और भी कई सीरियल्स किए लेकिन टेलीविजन इंडस्ट्री में उन्हें असल पहचान सीरियल ‘देश में निकला होगा चांद’ के जरिए मिली। इसके बाद साल 2003 में ‘विरासत’ और 2013 में ‘जी ले जरा’ सीरियल में उम्दा किरदार निभाकर भी संगीता ने खूब सुर्खियों बंटोरीं। इन दिनों संगीता स्टार प्लस के सीरियल ‘दिव्य दृष्टि’ की वजह से चर्चा में हैं। जल्द ही वह इस सीरियल में नजर आएंगी। हाल ही में टेलीफोन पर संगीता घोष से लंबी बातचीत हुई। पेश है बातचीत के चुनिंदा अंश-
‘दिव्य दृष्टि’ किस तरह का सीरियल है और इसे करने की खास वजह क्या थी?
यह एक सुपरनेचुरल फैंटेसी सीरियल है। इसे करने की वजह भी यही है कि यह एक रेग्युलर ड्रामा सीरियल नहीं बल्कि सुपरनेचुरल सीरियल है। इन दिनों इस तरह के सीरियल का ट्रेंड टीवी पर बन हुआ है। नब्बे प्रतिशत सीरियल इसी टॉपिक पर बेस्ड हैं। साथ ही इस सीरियल में मेरे किरदार को बहुत ही बेहतरीन ढंग से नरेट किया गया है। मेरा किरदार मुझे बहुत अहम भी लगा और टू बी वेरी ओनेस्ट मैं यही कहूंगी कि मैंने अपने करियर में कभी इस जॉनर का सीरियल नहीं किया है और ना ही कभी फैंटेसी किरदार निभाया है, सो मैं ऐसे किरदार के साथ इंसाफ कर पाती हूं भी या नहीं, यह जानने के लिए भी मैंने यह सीरियल साइन किया।

‘दिव्य दृष्टि’ सीरियल में अपने किरदार के बारे में कुछ बताएं...?
इस सीरियल में तीन अहम किरदार हैं दिव्या, दृष्टि और साक्षीनी। मैं इसमें साक्षीनी का किरदार निभा रही हूं, जिसे आप एक सुपरनेचुरल किरदार बोल सकते हैं, लेकिन मेरे मुताबिक उसे फैंटेसी किरदार कहना ज्यादा ठीक होगा। वैसे तो साक्षीनी बहुत ही पावरफुल हैं लेकिन एक पावर अभी भी ऐसी है, जो उसके पास नहीं है और वो पावर है ‘दिव्य दृष्टि’, जिसे पाकर वो और भी पावरफुल बन जाएगी। यहां ‘दिव्य दृष्टि’ का मतलब एक ऐसी दृष्टि की प्राप्ति से है, जिसे पाकर आप भविष्य में क्या होने वाला है, ये देख सकते हैं। मैं ही क्या हम तीनों में से यह शक्ति जिसे भी मिलेगी, वो सबसे ज्यादा पावरफुल बन जाएगी।
सीरियल के टीजर में आप एक्शन करते दिख रही हैं, ऐसे में किरदार के लिए आपने कैसी तैयारियां कीं?
मैंने कोई एक्शन की तैयारी नहीं की है, सब कुछ केबल का कमाल है। केबल के जरिए आप ऊंचाई से कूद सकते हैं, हवा में उड़ सकते हैं, कुछ भी कर सकते हैं। अब तो वीएफएक्स से भी ऐसे सीन फिल्माने में काफी मदद मिलने लगी है। हां, मेरी भी कुछ तैयारियां हैं, जैसे अपने किरदार को समझने और उसे सही ढंग से पेश करने की। फिजिकली एक्टिव और फिट रहने की जिससे मेरे साथ कोई दुर्घटना ना हो या मुझे किसी चोट का सामना ना करना पड़े क्योंकि सीरियल में मेरे कॉस्ट्यूम और ज्वेलरी बहुत ही हैवी हैं, वो सब पहनकर केबल के जरिए ऐसे सींस देने के लिए फिजिकली मेरा फिट रहना और एक्टिव होना बहुत जरूरी है।
अगर असल जिंदगी में आपको ‘दिव्य दृष्टि’ मिल जाए तो क्या आप अपना फ्यूचर देखना पसंद करेंगी?
जी बिल्कुल नहीं, (हंसते हुए) मुझे अपना फ्यूचर देखने में बिल्कुल भी दिलचस्पी नहीं है। अगर सब कुछ मुझे पहले से ही दिख जाएगा तो जीने में मजा कैसे आएगा। आज जीवन में एक पल खुशी मिलती है तो दूसरे समय तकलीफ और मुसीबत, ऐसे में मुसीबत या तकलीफ से बाहर निकलना और फिर से खुशी को अपने इर्द-गिर्द पाना, जितना सुखद होता, उतना सुखद भविष्य जानने के बाद नहीं होगा। ऐसे में अगर मैं फ्यूचर जान जाऊंगी तो जिंदगी जीने का मजा ही खो दूंगी।
आपके दौर के कलाकारों में और आज के नए कलाकारों में क्या फर्क देखती हैं?
आजकल के कलाकार एक छोटे शहर से आए हों या फिर दिल्ली जैसे बड़े शहर से, वो पूरी तैयारी में आते हैं। सिर्फ एक्टिंग वाइस की नहीं बल्कि खुद को कैसे कैरी करना है यह भी वो जानते हैं। वो टीवी, डिजिटल प्लेटफार्म में सब कुछ देखकर तो एक्टिंग और डांस क्लास में सब कुछ सीखकर आते हैं। एक वाक्य में कहा जाए तो वो फिजिकली और मेंटली दोनों तरह से प्रीपेयर्ड होकर आते हैं। जबकि हमारे समय में ऐसा नहीं था, लेकिन हम बहुत लकी थे कि हमें इतने अच्छे राइटर और मेकर्स मिले, जिनकी बदौलत हमने आईकॉनिक किरदार निभाया। शायद, इसलिए आज भी लोग हमें हमारे किरदार के नाम से जानते हैं।
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