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Interview : मैंने सिर्फ रुपए कमाने के लिए फिल्में नहीं कीं : रघुवीर यादव

रघुवीर यादव बस सेलेक्टिव फिल्में करते हैं, सिर्फ उम्दा किरदार करने में यकीन रखते हैं। हाल ही में रघुवीर यादव से उनके करियर और प्रोजेक्ट्स को लेकर लंबी बातचीत हुई।

Interview : मैंने सिर्फ रुपए कमाने के लिए फिल्में नहीं कीं : रघुवीर यादव
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रघुवीर यादव बस सेलेक्टिव फिल्में करते हैं, सिर्फ उम्दा किरदार करने में यकीन रखते हैं। जल्द ही वह ‘ब्लैकबोर्ड वर्सेस व्हाइटबोर्ड’ में एक स्कूल हेड मास्टर के रोल मे नजर आएंगे। एजुकेशन सिस्टम से जुड़ी इस फिल्म में दर्शकों को क्या मैसेज देने की कोशिश की गई है? आगे वह किन प्रोजेक्ट्स में बिजी हैं, बता रहे हैं रघुवीर यादव।

रघुवीर यादव थिएटर और फिल्मों के मंझे हुए कलाकार हैं। आमिर खान की फिल्म ‘लगान’ में उनका भूरा का रोल दर्शकों के जेहन में आज भी ताजा है। पिछले साल वरुण धवन की फिल्म ‘सुई धागा’ में भी उन्होंने कमाल की एक्टिंग की।
अब गणतंत्र दिवस के मौके पर उनकी फिल्म ‘ब्लैकबोर्ड वर्सेस व्हाइटबोर्ड’ रिलीज होने जा रही है। सरकारी प्राथमिक स्कूलों की वर्तमान स्थिति पर आधारित इस फिल्म में उनका किरदार बहुत अहम है। पेश है इस फिल्म और करियर से जुड़ी बातचीत रघुवीर यादव से।

आप बहुत सेलेक्टिव फिल्में करते हैं। फिल्म ‘ब्लैकबोर्ड वर्सेस व्हाइटबोर्ड’ के लिए आपने क्या सोचकर हामी भरी?

इस फिल्म की स्क्रिप्ट जब मैंने पढ़ी तो कहानी दिल को छू गई। फिल्म के प्रोड्यूसर नूपुर श्रीवास्तव, गिरीश तिवारी और आशुतोष सिंह रतन और निर्देशक तरुण बिष्ट का यह पहला प्रयास था। मुझे यह बात बड़ी अच्छी लगी कि कोई फिल्म मेकर मैसेज के साथ एक फिल्म बनाने जा रहा है, जिसका कमर्शियल एंगल बहुत ज्यादा नहीं है। यह फिल्म बहुत कुछ सोचने को मजबूर करती है, साथ ही काफी कुछ करने को प्रेरित करती है। इसलिए मुझे लगा कि इस फिल्म को करना चाहिए।

इस फिल्म को आप कैसे डिफाइन करेंगे और इसमें आपका रोल क्या है?

फिल्म ‘ब्लैकबोर्ड वर्सेस व्हाइटबोर्ड’ सरकारी स्कूलों की बुरी कंडीशन को दिखाती है। फिल्म में अमित नाम का एक युवा टीचर यह फैसला करता है कि वह स्कूल में बच्चों को अच्छी तरह से पढ़ाएगा, जिससे आगे जिंदगी में उन्हें कोई दिक्कत न हो।
अमित की पोस्टिंग जिस स्कूल में होती है, उसकी हालत बहुत ही खराब है। गांव का मुखिया स्कूल कमेटी का सेक्रेट्री है, लेकिन उसने अपना एक प्राइवेट स्कूल भी खोल रखा है।
मुखिया गांव के सरकारी स्कूल की हालत में सुधार नहीं चाहता। उसी स्कूल का हेड मास्टर दीनानाथ है, इस रोल को मैंने प्ले किया है। इसी दौरान स्कूल में एक न्यूज रिपोर्टर आती है, स्कूल की दशा सुधारने के लिए अमित को चैलेंज देकर जाती है।
फिर कैसे अमित उस सरकारी स्कूल को एक आदर्श स्कूल में बदलता है, इसका नतीजा क्या होता है? यही फिल्म में दिखाया गया है। इस फिल्म में मेरा रोल एक स्कूल के ऐसे हेड मास्टर का है, जो चाहता है कि बच्चे ठीक से पढ़ें- लिखें, लेकिन उसके रास्ते में भी कुछ अड़ंगे आते हैं, कुछ लोग धमकी देते हैं कि उन्हें स्कूल चलाने नहीं दिया जाएगा।
कैसे दीनानाथ इन मुश्किलों का सामना करता है, यह आपको फिल्म देखकर पता चलेगा। इस फिल्म के जरिए यह भी कहने की कोशिश की गई है कि अगर स्कूल के टीचर चाहें तो न सिर्फ स्कूल में सुधार ला सकते हैं बल्कि स्टूडेंट्स की पढ़ाई भी बेहतर हो सकती है।
फिल्म यह संदेश भी देती है कि यदि दृढ़ इच्छा शक्ति हो तो हालात बदले जा सकते हैं। इस फिल्म में मेरे अलावा अशोक सामर्थ, पंकज झा, धर्मेंद्र सिंह, अली स्मिता गोस्वामी, मनु कृष्णा, मधु रॉय भी हैं।

इस फिल्म का टाइटल ‘ब्लैकबोर्ड वर्सेस व्हाइटबोर्ड’ क्या कहना चाहता है?

आजकल व्हाइटबोर्ड भी होने लगे हैं, पहले तो ब्लैकबोर्ड ही होता था। हमने तो ब्लैकबोर्ड पर ही पढ़ाई की है, उस पर चॉक से लिखा जाता था लेकिन आजकल बड़े शहरों में व्हाइटबोर्ड पर लिखा जाता है। प्राइवेट स्कूलों में या बड़े स्कूलों में व्हाइटबोर्ड का फैशन है, यह फिल्म दरअसल उन्हीं दोनों तरह के स्कूलों के बीच एक मुकाबले की कहानी कहती है।

क्या आपको लगता है कि सरकारी स्कूल की तालीम में आज कुछ बदलाव आया है?

देखिए, मुझे तो ऐसा लगता है कि गांव में पहले जिस तरह की तालीम दी जाती थी, आज भी हालत वही है। मैंने भी सरकारी स्कूल में पढ़ाई की थी। इस देश में शिक्षा व्यवस्था, शिक्षकों और बच्चों की जो हालत है, वह बड़ी अजीब हैं।
मुझे लगता है कि शिक्षा व्यवस्था में आज भी सुधार नहीं हुआ है। यह अब बिजनेस बन गया है। हमारी फिल्म में एक डायलॉग है-‘विद्या के मंदिर को व्यापार का अड्डा बना दिया गया है।’

सुनने में आया है कि इस फिल्म में आपने बतौर सिंगर भी काम किया है?

जी हां, इस फिल्म में मैंने दो गाने अपनी आवाज में भी गाए हैं। दोनों गाने एजुकेशन पर हैं। एक गीत है ‘स्कूल चलो…’ और एक और गाना सिचुएशनल है, जो 15 अगस्त के फंक्शन पर फिल्माया गया है। आमिर खान की फिल्म ‘पीपली लाइव’ में भी मैंने ‘महंगाई डायन’ गाना गाया था, जो बेहद पॉपुलर हुआ था।

इस फिल्म के अलावा आपके अपकमिंग प्रोजेक्ट्स कौन से हैं?

हाल ही में मैंने ‘न्यूटन’ बनाने वाले प्रोडक्शन हाउस दृश्यम फिल्म्स की एक फिल्म ‘अनाम’ की है। मैंने अभी मथुरा में इसकी शूटिंग की है, इसमें मेरा एक इंट्रेस्टिंग किरदार है। यशराज फिल्म्स की फिल्म ‘सुई धागा’ के बाद नेक्स्ट फिल्म ‘संदीप और पिंकी फरार’ कर रहा हूं। ‘संदीप और पिंकी फरार’ में अर्जुन कपूर के साथ परिणीति चोपड़ा लीड रोल में हैं।
एक और फिल्म ‘मानसी’ करने जा रहा हूं। मैं बड़ा चूजी एक्टर रहा हूं, जब तक मुझे स्क्रिप्ट अच्छी नहीं लगती मैं जल्दी हां नहीं कहता। मैं कभी पैसों के पीछे नहीं भागा। मैंने सिर्फ रुपए कमाने के लिए फिल्में नहीं कीं। मैंने हमेशा अच्छी फिल्में ही की हैं। आगे भी उम्दा सिनेमा का हिस्सा बनना चाहता हूं। जिस रोल को करने में मुझे संतुष्टि मिले, मैं वही कुबूल करता हूं।

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