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घरेलू महिलाओं को ड्रामा ज्यादा पसंद आता है: फेनिल

फेनिल उमरीगर जीटीवी के सीरियल ‘काला टीका’ में गौरी का किरदार निभा रही हैं।

घरेलू महिलाओं को ड्रामा ज्यादा पसंद आता है: फेनिल
मुंबई. इन दिनों जीटीवी पर आ रहे सीरियल ‘काला टीका’ ने अपने किरदारों से दर्शकों के बीच अपनी एक अलग जगह बना ली है। अब सीरियल में काफी ट्विस्ट-टर्न आने वाले हैं, जिससे सीरियल में काफी ड्रामा क्रिएट होगा। इस सीरियल में गौरी का एक अहम कैरेक्टर निभाने वाली फेनिल उमरीगर से सीरियल में होने वाले चेंजेज पर बातचीत।
सीरियल ‘काला टीका’ काफी समय से टीवी पर आ रहा है, अब इसमें क्या नया देखने को मिलेगा?
सीरियल में काफी बदलाव हुए हैं। मेरे कैरेक्टर यानी गौरी की बेटी नैना के ऊपर काला साया जैसा कुछ होने वाला है। मतलब वह बात-बात पर रोना शुरू कर देती है, बीमार पड़ जाती है। कभी उसके जूतों में कीलें लगी होती हैं। यह सब एक रहस्य की तरह होता है, हम डरे हुए हैं कि यह सब हो कैसे रहा है। फिर एक अघोरी बाबा बताते हैं कि नैना के ऊपर कोई काला साया है। जिस वजह से वह कुछ ही दिनों में मरने वाली है। इसलिए उसकी रक्षा के लिए काली को तप करना होगा। अगर यह तप सफल हो गया, तभी नैना बच पाएगी। बहुत ही रोमांच से भरा ट्रैक है।
क्या आपके कैरेक्टर का शेड भी बदलेगा?
हां, थोड़ा बदलाव तो होगा ही, क्योंकि पिछले दिनों जैसा सीरियल में दिखाया गया था कि घर में पूजा हुई, तो यह तय किया गया कि नैना के लिए जो भी करेगी वह काली करेगी। बेशक मैंने नैना को जन्म दिया है लेकिन काली का झुकाव और लगाव नैना की तरफ ज्यादा है। ऐसे में एक मां होने की वजह से मेरे अंदर जलन होना स्वाभाविक है, क्योंकि नैना की असली मां तो मैं ही हूं। बेटी के लिए तप करने का अधिकार मुझे मिलना चाहिए। कुछ इस तरह ही दिक्कत आगे और बढ़ेगी और मुझे काली का नैना के लिए इतना सब करना पसंद नहीं आएगा, लेकिन अपनी बेटी के भले के लिए मुझे चुप भी रहना होगा। बहुत उथल-पुथल होगी।
हम 2016 में जी रहे हैं, टीवी पर इस तरह का अंधविश्वास दिखाने का ट्रेंड बढ़ता जा रहा है। क्या इसे आप ठीक मानती हैं?
अगर अपने किरदार गौरी को साइड में रख दूं और फेनिल के नजरिए से कहूं तो मैं अंधविश्वास पर यकीन नहीं करती हूं। हां, यह जरूर मानती हूं कि कोई ताकत है, जो मेरे आस-पास है और दुनिया में जो कुछ भी हो रहा है, उसे चला रही है। वह एक पॉजिटिव एनर्जी है। लेकिन जब हम पॉजिटिव एनर्जी बोलते हैं, तो इसका मतलब नेगेटिव एनर्जी भी कहीं न कहीं है, जो काम बिगाड़ रही है। लेकिन इसके लिए मेरा मानना यह नहीं है कि मैं भगवान जी को दस बार दूध चढ़ाऊं, नहीं तो वे नाराज हो जाएंगे। इस तरह की बातों पर मेरा भरोसा नहीं है। लेकिन मैं भगवान पर यकीन रखती हूं। मेरे अनुसार अंधविश्वास नहीं होना चाहिए। लेकिन हमारा सीरियल ‘काला टीका’ अपने आप में बहुत अलग है। इसमें एक लड़की काली मेरा काला टीका बनती है। आमतौर पर हम काला टीका काजल से करते हैं, लेकिन जब कोई जीता जागता इंसान किसी का काला टीका बन जाता है, तो यह बहुत ही अलग तरह का सब्जेक्ट बन जाता है। यही वजह थी कि मेरा मन हुआ कि मैं इस सीरियल का हिस्सा बनूं।
क्या आप यह मानती हैं कि दर्शकों को इस तरह के कॉन्सेप्ट पसंद आ रहे हैं?
इंडियन आॅडियंस ग्रो नहीं कर रही है, ऐसा मुझे लगता है। यही वजह है कि अगर दर्शकों को किसी भी तरह की ड्रामा से भरी चीजें दिखाई जाती हैं, तो उन्हें पसंद आती हैं और उससे चैनलों की टीआरपी भी बढ़ जाती है।
घरेलू महिलाओं को
ड्रामा ज्यादा पसंद आता है
‘काला टीका’ जैसे अंधविश्वास वाले सीरियल लोगों पर कितना गहरा असर छोड़ते हैं, इस सवाल के जवाब में फेनिल उमरीगर कहती हैं, ‘ऐसे लोग जो बहुत जल्दी ही किसी के प्रभाव में आ जाते हैं, उन पर तो जरूर असर पड़ता होगा। इस संदर्भ में एक बात जरूर कहना चाहूंगी कि हमारे टीवी दर्शकों में ज्यादातर घरेलू महिलाएं ही होती हैं, इसलिए उन्हें इसी तरह का ड्रामा ज्यादा पसंद आता है, जो इन दिनों चल रहा है। अगर आप बाहर के शोज देखें, तो उनके सब्जेक्ट बहुत ही अलग होते हैं, क्योंकि वहां की आॅडियंस अलग सब्जेक्ट की डिमांड करती है। जब हमारे आॅडियंस डिफरेंट सीरियल की डिमांड करेगी, तो यहां भी अलग तरह की कहानियां देखने को मिलेंगी।
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