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रोबोट्स वेल मैनेज हों तो हमारी जिंदगी आसान बन जाएगी: रिद्धिमा पंडित

रिद्धिमा ने पहले मॉडलिंग की और फिर ऐड फिल्मों में काम किया।

रोबोट्स वेल मैनेज हों तो हमारी जिंदगी आसान बन जाएगी: रिद्धिमा पंडित
नई दिल्ली. किसी घर में बहू रोबो हो तो बड़ी अजोबो-गरीब सिचुएशन होगी। ऐसी ही सिचुएशन देखने को मिल रही है लाइफ ओके के सीरियल ‘बहू हमारी रजनी-कांत’ में। सीरियल में रोबो बनी हैं रिद्धिमा पंडित। क्या रियल लाइफ में भी वह रोबो स्टाइल में काम करती हैं? असल जिंदगी में रोबोट्स का दखल हमारी जिंदगी को कितना बदल सकता है? टेक्नोडिपेंडेंट होने का क्या असर हमारी लाइफ पर पड़ता है? रिद्धिमा पंडित से ऐसे ही कुछ और जरूरी सवाल।
बचपन में रिद्धिमा पंडित को एक्टिंग का शौक जरूर था, लेकिन उन्होंने कभी इसे अपना प्रोफेशन बनाने की नहीं सोची। एक दिन उन्हें लगा कि एक्टिंग को सीरियसली लेना चाहिए, बस वह ग्लैमर वर्ल्ड की दुनिया में आ गर्इं। रिद्धिमा ने पहले मॉडलिंग की और फिर ऐड फिल्मों में काम किया। इसी बीच उन्हें लाइफ ओके के सीरियल ‘बहू हमारी रजनी-कांत’ में लीड रोल मिला। इस सीरियल में वह एक रोबोट बनी हैं। बातचीत रिद्धिमा पंडित से।
आप सीरियल ‘बहू हमारी रजनी-कांत’ में एक रोबोट बनी हैं, वह हर तरह के काम फटाफट कर लेती है? क्या असल जिंदगी में आप भी रोबोट के स्टाइल में काम करती हैं?
नहीं, मैं रजनी की तरह फटाफट काम नहीं कर सकती। मैं एक वक्त में बस एक ही काम कर पाती हूं। लेकिन अब रजनी का रोल प्ले करके मल्टीटास्किंग में थोड़ी बेहतर हो गई हूं। लेकिन कई लोग ऐसे होते हैं, जो मल्टीटास्किंग होते हैं, यह अच्छी बात है। खासकर महिलाएं मल्टीटास्किंग में काफी परफेक्ट होती हैं।
आपने कहा महिलाएं मल्टीटास्किंग में बेहतर होती हैैं, लेकिन हर काम करने के बाद भी उन्हें घर-परिवार में उतनी रेस्पेक्ट नहीं मिलती, जितनी मिलनी चाहिए, इस पर क्या कहेंगी?
सोसायटी को इस तरह की थिंकिंग बदलनी चाहिए। हमें हर महिला के काम की रेस्पेक्ट करनी चाहिए। आखिर वह भी किसी रोबोट की तरह घर और बाहर के काम को बखूबी अंजाम देती है। ऐसे में परिवार को चाहिए कि वह उन्हें पूरा प्यार और मान-सम्मान दें। आखिर महिलाएं ही तो परिवार की धुरी हैं। साथ ही पुरुषों को भी चाहिए कि अपनी वाइफ की हेल्प करें। मैंने अपने घर-परिवार में अपने पापा को मम्मी की हेल्प करते देखा है। पापा को मेरे लिए ब्रेकफास्ट बनाते देखा है। ऐसी बातों से ही तो परिवार में खुशहाली आती है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि 2050 तक हमारी जिंदगी में रोबोट्स का दखल बहुत बढ़ जाएगा, आपको नहीं लगता कि इससे हमारी जिंदगी बहुत अजीब हो जाएगी?
मुझे ऐसा नहीं लगता है। मैं मानती हूं कि अगर रोबोट्स वेल मैनेज हों, तो हमारी जिंदगी आसान हो जाएगी। रोबोट्स अगर ह्यूमन की मदद करेंगे, तो हम ज्यादा तरक्की करेंगे। रजनी को भी घर के काम करने के लिए बनाया गया था और वह हर काम परफेक्टली करती भी है। इतना जरूर है कि वह फीलिंग्स की जगह लॉजिक को इंपॉर्टेंस देती है। लेकिन इसके बावजूद वह इंसानों को प्यार और अपनेपन का मतलब अपने ही अंदाज में समझा रही है।
आपको लगता है रोबोट्स के जरिए दी जाने वाली कंफर्ट भरी लाइफ फीलिंग्स और इमोशंस की जगह ले पाएगी?
नहीं, फीलिंग्स और इमोशंस की जगह रोबोट्स कभी नहीं ले पाएंगे। हम जो प्यार, अपनापन और स्नेह भरा स्पर्श अपनों से पाते हैं, उसकी तुलना किसी भी चीज से नहीं की जा सकती है।
आज जिस तरह लोग टेक्नोडिपेंडेंट हो रहे हैं, उससे लाइफ बहुत डिस्टर्ब हो रही है, इस पर आप क्या सोचती हैं?
मैं खुद भी काफी टेक्नोडिपेंडेंट हूं। आज यह हमारी जरूरत बन गई है। लेकिन हमें टेक्नोएडिक्शन का शिकार होने से बचना चाहिए, वरना इससे कई तरह की प्रॉब्लम हमें अपनी लाइफ में फेस करनी पड़ती हैं।
सीरियल में रजनी, जो एक रोबोट है, एक परफेक्ट बहू का रोल भी बखूबी निभा रही है। लेकिन फिर भी उसे अपनी सासू मां से तारीफ नहीं मिलती है, क्या सासू मां को रोबोट भी इंप्रेस नहीं कर सकता है?
सासू मां को कोई भी इंप्रेस नहीं कर सकता है। यह दुनिया का यूनिवर्सल टूथ है। लेकिन एक बहू को अपनी कोशिश जारी रखनी चाहिए। मैंने अपनी मां को देखा है, वह दुनिया की सबसे अच्छी बहू हैं, लेकिन वह कैसी सास होंगी, यह कहना मेरे लिए अभी मुश्किल है। मैं तो भगवान से प्रार्थना करती हूं कि मुझे एक अच्छी सासू मां मिलें।
इस सीरियल के बाद फ्यूचर प्लान क्या हैं?
मैं कभी प्लानिंग के साथ नहीं चलती हूं। आज में जीने में यकीन रखती हूं। हां, अभी इस सीरियल में बहुत बिजी हूं। लेकिन इसके बाद थोड़ा रिलैक्स करूंगी, उसके बाद सोचूंगी।

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