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प्रोस्टेट कैंसर के ये हैं लक्ष्ण, ऐसे करें बचाव

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Jul 16 2017 12:43PM IST
प्रोस्टेट कैंसर के ये हैं लक्ष्ण, ऐसे करें बचाव

प्रोस्टेट हमारे शरीर के लिए महत्वपूर्ण ग्रंथि होती है। यह एक ऐसे द्रव का निर्माण करती है, जिसमें वीर्य के जीवित रहने के पदार्थ निहित रहते हैं।

डॉ. भीमराव अम्बेडकर हास्पिटल में क्षेत्रीय कैंसर संस्थान के संचालक व प्राध्यापक डॉ. विवेक चौधरी बताते हैं कि प्रोस्टेट में जब कोई असामान्यता होती है, तो इसका आकार बढ़ने लगता है। इसके चलते पेशाब में रुकावट आती है।

प्रोस्टेट में जब भी कोई कैंसर होता है, तो वह ग्रंथि के अंदर ही बढ़ता रहता है। प्रोस्टेट कैंसर आमतौर पर 50 वर्ष की उम्र के बाद ही होता है।

अनुवांशिक कारणों से भी हो सकता है प्रोस्टेट कैंसर। डॉक्टर का कहना है कि सही समय पर पता चलने और उचित चिकित्सा से प्रोस्टेट कैंसर बचा जा सकता है।

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प्रोस्टेट कैंसर के कारण-

प्रोस्टेट कैंसर होने के असली कारणों का पता अभी तक नहीं चल पाया है, लेकिन कुछ कारण हैं जो कैंसर के इस प्रकार के लिए जोखिम कारक हैं।

धूम्रपान, मोटापा, सेक्स के दौरान फैला वायरस या फिर शारीरिक शिथिलता या व्यायाम न करना प्रोस्टेट कैंसर का कारण हो सकता है। कभी-कभी असुरक्षित तरीके पुरुषों की नसबंदी भी प्रोस्टेट कैंसर का कारण बनती है।

यदि परिवार में किसी को पहले भी प्रोस्टेट कैंसर हुआ है, तो भी इस कैंसर के होने का जोखिम बना रहता है। ज्यादा वसायुक्त मांस खाना भी प्रोस्टेट कैंसर का कारण बन सकता है।

जिन पुरुषों की प्रजनन क्षमता कम होती है, उनको भी प्रोस्टेट कैंसर होने का खतरा होता है। लिंग गुणसूत्रों में गड़बड़ी के कारण भी प्रोस्टेट कैंसर हो सकता है।

प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण-

  • प्रोस्टे‍ट कैंसर होने पर रात में पेशाब करने में दिक्कत होती है।
  • रात में बार-बार पेशाब आता है और आदमी सामान्य अवस्था की तुलना में ज्यादा पेशाब करता है।
  • पेशाब करने में कठिनाई होती है और पेशाब को रोका नही जा सकता है, पेशाब रोकने में बहुंत तकलीफ होती है।
  • पेशाब रुक-रुक कर आता है, जिसे कमजोर या टूटती मूत्रधारा कहते हैं।
  • पेशाब करते वक्त जलन होती है।

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प्रोस्टेट कैंसर का उपचार-

  • वृद्धावस्था में प्रोस्टेट कैंसर होने की ज्यादा आशंका होती है। यदि प्रोस्टेट कैंसर का पता स्टेज-1 और स्टेज-2 में चल जाए, तो इसका बेहतर इलाज रेडिकल प्रोस्टेक्टमी नामक ऑपरेशन से होता है।
  • लेकिन, यदि प्रोस्टेट कैंसर का पता स्टेज-3 व स्टेज-4 में चलता है, तो इसका उपचार हार्मोनल थेरैपी से किया जाता है।
  • गौरतलब है कि प्रोस्टेट कैंसर की कोशिकाओं की खुराक टेस्टोस्टेरान नामक हार्मोन से होती है। इसलिए पीड़ित पुरुष के टेस्टिकल्स को निकाल देने से इस कैंसर को नियंत्रित किया जा सकता है।
  • खान-पान और दिनचर्या में बदलाव करके प्रोस्टेट कैंसर की आशंकाओं को कम किया जा सकता है। ज्यादा चर्बी वाले मांस को खाने से परहेज कीजिए।
  • धूम्रपान और तंबाकू का सेवन करने से बचिए। यदि आपको प्रोस्टेट कैंसर की आशंका दिखे, तो चिकित्सक से संपर्क जरूर कीजिए।
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-Tags:#Prostate Cancer Stages#Health Tips
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