मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के बीच भारत में LPG की उपलब्धता को लेकर बहस तेज हो गई है। कई शहरों में कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित होने और एजेंसियों के बाहर लंबी कतारों की खबरों ने आम लोगों और छोटे कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है।
इस मुद्दे पर संसद से लेकर सड़कों तक सरकार और विपक्ष आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं।
सरकार का दावा बनाम ज़मीनी सवाल
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि भारत में कच्चे तेल और गैस की सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित है। उनके अनुसार देश में LPG उत्पादन करीब 28% तक बढ़ाया गया है और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर घबराने की कोई जरूरत नहीं है।
लेकिन कई स्थानों से गैस सिलेंडर की बुकिंग में देरी, एजेंसियों के बाहर भीड़ और कमर्शियल सिलेंडर की कमी की खबरें सामने आ रही हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर आपूर्ति सामान्य है, तो फिर जमीनी स्तर पर संकट जैसी स्थिति क्यों दिखाई दे रही है?
मिडिल ईस्ट तनाव का असर
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल बाजार को अस्थिर कर दिया है। इसका असर भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो ईंधन कीमतों और आपूर्ति दोनों पर दबाव बढ़ सकता है।
सबसे बड़ा सवाल
क्या सच में देश में LPG संकट गहराया है या फिर इसे लेकर सियासी बयानबाज़ी ज्यादा हो रही है?
सवाल बहुतेरे हैं, जिन पर हरिभूमि और INH के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी के साथ विशेष “चर्चा” में राजनीतिक दलों के प्रवक्ताओं, उद्योग प्रतिनिधियों और विदेश मामलों के जानकार ने अपनी राय रखी।
चर्चा में शामिल हुए
- शरद त्रिवेदी – प्रवक्ता, बीजेपी
- डॉ. ब्रह्मदीप अलूने – विदेश मामलों के जानकार
- प्रताप जैन – संचालक, जैन गैस एजेंसी
- सुरेंद्र शर्मा – अध्यक्ष, होटल एवं रेस्टोरेंट संघ उत्तर प्रदेश
- सुरेंद्र राजपूत – प्रवक्ता, कांग्रेस
इस गंभीर मुद्दे पर किसने क्या कहा?
यहां देखिए पूरा वीडियो










