मध्य पूर्व में हालात तेजी से बदल रहे हैं। अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले के बाद क्षेत्रीय तनाव गहराता जा रहा है। ईरान ने कड़ा पलटवार किया है और संघर्ष का दायरा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
इस घटनाक्रम के बाद कई देशों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। रूस और चीन जैसे देशों ने क्षेत्रीय संप्रभुता का मुद्दा उठाया है, जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी अपनी रणनीतिक स्थिति स्पष्ट कर रहे हैं। कुवैत में अमेरिकी लड़ाकू विमानों के क्रैश होने की खबर ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। अलग-अलग दावे और प्रतिदावे सामने आ रहे हैं, जिससे वैश्विक चिंता बढ़ी है।
सबसे बड़ा सवाल यही है-
क्या यह संघर्ष सीमित रहेगा या व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है?
इसी गंभीर मुद्दे पर हरिभूमि और INH के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी के साथ विशेष “चर्चा” में रक्षा, विदेश नीति और कूटनीति से जुड़े विशेषज्ञों ने अपनी राय रखी।
- प्रेम कुमार – वरिष्ठ पत्रकार
- जेएस सोढ़ी – लेफ्टिनेंट कर्नल (से.नि.), रक्षा विशेषज्ञ
- डॉ. ब्रम्हदीप अलूने – विदेश मामलों के जानकार
- मंजू सेठ – पूर्व राजनयिक
इस गंभीर मुद्दे पर किसने क्या कहा?










