लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को लेकर संसद में तीखी बहस छिड़ गई है। आजाद भारत के संसदीय इतिहास में यह चौथा मौका है जब किसी स्पीकर की निष्पक्षता को लेकर औपचारिक चुनौती दी गई है।
विपक्ष का आरोप है कि अध्यक्ष सदन में सत्ता पक्ष की ढाल बन गए हैं और विपक्ष की आवाज को पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहा। वहीं सरकार की ओर से इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा गया है कि यह लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश है।
संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू और गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों पर कड़ा पलटवार किया है।
सबसे बड़ा सवाल यही है
क्या विपक्ष संख्या बल के बावजूद इस प्रस्ताव के जरिए अध्यक्ष की कुर्सी को चुनौती दे पाएगा या यह केवल राजनीतिक संदेश भर है?
इसी मुद्दे पर हरिभूमि और INH के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी के साथ विशेष “चर्चा” में राजनीतिक दलों के प्रवक्ताओं और विश्लेषकों ने खुलकर अपनी राय रखी।
चर्चा में शामिल हुए-
- कैप्टन इंद्रजीत सिंह – प्रवक्ता, भाजपा
- हाजी मेहरुद्दीन रंगरेज – प्रवक्ता, कांग्रेस
- भगवान देव ईसरानी – पूर्व प्रमुख सचिव, मध्य प्रदेश विधानसभा
- संजीव कौशिक – राजनीतिक विश्लेषक
इस गंभीर मुद्दे पर किसने क्या कहा?










