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बुलंदशहर में सांड से टकराने के बाद लक्ष्मी नारायण की अस्पताल में मौत हो गई। पिता के निधन की खबर सुनते ही 17 साल की बेटी ममता ने भी दम तोड़ दिया।

बुलंदशहर: बुलंदशहर के नरौरा थाना क्षेत्र में एक दर्दनाक सड़क हादसे ने हंसते-खेलते परिवार की खुशियां उजाड़ दीं। रामघाट निवासी लक्ष्मी नारायण रावल (55), जो डिबाई स्थित मथुरिया इंटर कॉलेज में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और कॉलेज परिसर में चौकीदार के रूप में कार्यरत थे, रविवार रात अपनी ड्यूटी पर जाने के लिए बाइक से निकले थे।

रात करीब 9:30 बजे बेलोन टोल प्लाजा के पास नेशनल हाईवे पर अचानक उनकी बाइक के सामने एक सांड आ गया। रफ्तार तेज होने के कारण लक्ष्मी नारायण बाइक पर नियंत्रण नहीं रख सके और सांड से उनकी जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि वह सड़क पर दूर जा गिरे, जिससे उनके सिर और शरीर में गंभीर चोटें आईं।

​इलाज के दौरान पिता ने तोड़ा दम, खबर सुनते ही बेटी की थम गई सांसें 
हादसे के तुरंत बाद राहगीरों ने लहूलुहान हालत में लक्ष्मी नारायण को एनपीएस चिकित्सालय पहुँचाया, जहाँ रात करीब 11 बजे उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। पुलिस ने जब रात में ही परिजनों को इस दुखद घटना की सूचना दी, तो घर में कोहराम मच गया। पिता की मौत की खबर उनकी 17 वर्षीय बेटी ममता के लिए वज्रपात जैसी थी।

ममता अपने पिता के बेहद करीब थी और वह इस गहरे सदमे को बर्दाश्त नहीं कर सकी। पिता का शव घर पहुँचने से पहले ही ममता ने भी दुनिया छोड़ दी। एक ही रात में परिवार के दो सदस्यों की मौत से रामघाट गांव में सन्नाटा पसर गया।

​शमशान घाट पर उमड़ा जनसैलाब, भाई ने दी दोनों को मुखाग्नि 
जब लक्ष्मी नारायण और ममता का शव अंतिम संस्कार के लिए गंगा तट पर लाया गया, तो वहाँ हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी। लक्ष्मी नारायण की पत्नी कृष्णा देवी, जो गांव की पूर्व प्रधान रह चुकी हैं, का रो-रोकर बुरा हाल था। गाँव की परंपरा और भारी माहौल को देखते हुए परिजनों ने दोनों की अंतिम विदाई अलग-अलग समय पर करने का निर्णय लिया।

पहले बेटी ममता की अंतिम यात्रा निकाली गई और उसके ठीक बाद पिता लक्ष्मी नारायण की अर्थी उठी। रामघाट के गंगा तट पर एक ओर पिता की चिता सजी थी और दूसरी ओर उनकी लाडली बेटी की। छोटे पुत्र ललित रावल (18) ने कांपते हाथों से पहले बहन और फिर पिता को मुखाग्नि दी।

​आवारा पशुओं का आतंक और टूटता परिवार

​इस घटना ने एक बार फिर हाईवे पर आवारा पशुओं के कारण होने वाले हादसों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लक्ष्मी नारायण अपने परिवार के मुख्य आधार थे और उनका क्षेत्र में काफी सम्मान था। उनकी पत्नी के पूर्व प्रधान होने के नाते परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा भी काफी थी। लेकिन एक आवारा सांड से हुई टक्कर ने न केवल लक्ष्मी नारायण की जान ली, बल्कि उनके बिछोह में एक जवान बेटी ने भी दुनिया को अलविदा कह दिया। गांव के हर शख्स की जुबान पर बस यही चर्चा थी कि ऐसी होनी किसी के साथ न हो।

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