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गाजियाबाद पुलिस ने किया एक बड़े अंतरराष्ट्रीय जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़, आरोपी नचौली गांव के एक पेट्रोल पंप पर पंचर की दुकान चलाने की आड़ में कर रहा था देश विरोधी काम।

हरियाणा के फरीदाबाद में देश की आंतरिक सुरक्षा में सेंध लगाने वाले एक बड़े जासूसी गिरोह का गाजियाबाद पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। फरीदाबाद से नौशाद अली उर्फ लालू नाम के एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया गया है, जो एक पेट्रोल पंप पर पंचर की दुकान चलाने के बहाने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों के लिए काम कर रहा था। पुलिस की जांच में सामने आया है कि यह गिरोह न केवल भारतीय सुरक्षा बलों की तस्वीरें भेजता था, बल्कि रेलवे स्टेशनों पर गुप्त कैमरे लगाकर लाइव फीड भी पाकिस्तान पहुंचा रहा था।

व्हाट्सएप के जरिए पाकिस्तान भेजता था सूचनाएं 
नौशाद अली पिछले तीन महीनों से फरीदाबाद के नचौली गांव स्थित एक पेट्रोल पंप पर पंचर बनाने का काम कर रहा था। बाहर से देखने पर वह एक साधारण मजदूर लगता था, लेकिन असल में वह भारतीय रेलवे स्टेशनों और सुरक्षा बलों के ठिकानों की संवेदनशील तस्वीरें और वीडियो बनाकर व्हाट्सएप के जरिए पाकिस्तान भेजता था। चौंकाने वाली बात यह है कि उसे एक फोटो भेजने के बदले 4 से 6 हजार रुपये का भुगतान किया जाता था।

पाकिस्तान में था कैमरों का सीधा एक्सेस 
गाजियाबाद पुलिस की तफ्तीश में एक और भयावह सच सामने आया है। इस गिरोह ने दिल्ली और हरियाणा (सोनीपत) के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर सोलर पावर से चलने वाले हाई-टेक कैमरे स्थापित किए थे। इन कैमरों का 'कंट्रोल' और 'एक्सेस' सीधे पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स के पास था। यानी दिल्ली और सोनीपत के रेलवे स्टेशनों की हर हलचल पाकिस्तान में लाइव देखी जा रही थी। पुलिस ने अब तक दो कैमरे बरामद किए हैं और उन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। 

450 से ज्यादा फाइलें भेजी जा चुकी थीं सीमा पार 
गिरोह के सरगना सुहेल (मेरठ निवासी) सहित अब तक 22 लोगों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। पूछताछ में पता चला है कि इन लोगों ने अब तक 450 से अधिक गोपनीय फोटो और वीडियो क्लिप्स पाकिस्तान भेजे हैं। गिरोह का प्लान देशभर में 50 ऐसे सोलर कैमरे लगाने का था, जिससे भारत के सामरिक ठिकानों की निगरानी की जा सके। प्रत्येक कैमरा लगाने के लिए आरोपियों को 10 से 15 हजार रुपये अलग से मिलते थे।

सादे कपड़ों में आई पुलिस और दबोचा गया 'लालू' 
नौशाद अली की गिरफ्तारी किसी फिल्मी सीन से कम नहीं थी, 16 मार्च की शाम गाजियाबाद पुलिस सादे कपड़ों में नचौली स्थित पेट्रोल पंप पर पहुंची। पुलिसकर्मियों ने पहले अन्य कर्मचारियों से सामान्य पूछताछ की ताकि नौशाद को शक न हो। जब पुष्टि हो गई कि पंचर बनाने वाला 'लालू' ही नौशाद अली है, तो उसे तुरंत हिरासत में ले लिया गया। पुलिस ने उसका मोबाइल फोन जब्त कर लिया है, जिसमें जासूसी से जुड़े कई अहम सबूत मिले हैं।

बिहार का रहने वाला है आरोपी
जांच में पता चला कि नौशाद मूल रूप से बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के हरचंदा गांव का रहने वाला है। उसे कोलकाता से बुलाकर यहां दुकान खुलवाई गई थी। पेट्रोल पंप के कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें लगा था कि नौशाद को किसी छोटी-मोटी चोरी के मामले में पकड़ा गया है, लेकिन जब रविवार को पुलिस दोबारा आई और देशद्रोह के मामले का खुलासा किया, तो सबके पैरों तले जमीन खिसक गई।

जांच एजेंसियों के रडार पर पूरा नेटवर्क
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस, यूपी एटीएस, दिल्ली पुलिस और हरियाणा पुलिस की संयुक्त टीमें आरोपियों से पूछताछ कर रही हैं। डीसीपी सिटी धवल जायसवाल ने बताया कि गिरोह में एक महिला और एक नाबालिग भी शामिल है। पुलिस अब उन कड़ियों को जोड़ने में जुटी है कि आखिर यह पैसा किस रूट से आ रहा था और इस नेटवर्क के पीछे पाकिस्तान की कौन सी खुफिया एजेंसी का हाथ है।

सुरक्षा पर उठे बड़े सवाल
हाईवे और रेलवे स्टेशनों के पास इस तरह संदिग्धों का पनाह लेना और वहां जासूसी उपकरण स्थापित कर देना सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करता है। फिलहाल पुलिस उन सभी लोगों की कुंडली खंगाल रही है, जिन्होंने नौशाद को फरीदाबाद में शरण दिलाने या दुकान खुलवाने में मदद की थी।
 
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