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इंदौर की iBus सेवा में UPI टिकटिंग लागू कर दी गई है, अब QR कोड से किया जा सकेगा किराए का भुगतान। खत्म होंगे किराए से जुड़े विवाद, यात्रियों को मिलेगा पारदर्शी और आसान सफर का अनुभव।

इंदौर। शहर की iBus सेवा अब पूरी तरह डिजिटल हो गई है। अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड (AICTSL) ने बसों में UPI आधारित टिकटिंग सिस्टम लागू कर दिया है, जिससे यात्रियों की लंबे समय से चली आ रही समस्याएं दूर होने की उम्मीद है। अब यात्रियों को टिकट के लिए नकद पैसे रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस नई व्यवस्था से किराए को लेकर होने वाले विवादों में कमी आएगी। साथ ही यात्रियों को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद सेवा मिलने की संभावना है।

किराया विवाद और ओवरचार्जिंग पर ब्रेक 
पहले बसों में कंडक्टर द्वारा टिकट जारी किए जाते थे, जिससे कई बार भ्रम की स्थिति बनती थी। भीड़भाड़ के समय और फुटकर  पैसे की कमी के कारण यात्रियों से ज्यादा किराया वसूले जाने की शिकायतें सामने आती थीं। इन वजहों से यात्रियों और कंडक्टर के बीच अक्सर कहासुनी भी हो जाती थी। अब UPI सिस्टम लागू होने से इस तरह की समस्याओं में काफी हद तक कमी जा जाएगी। हर भुगतान डिजिटल होने से पारदर्शिता भी बढ़ेगी और इसका पूरा रिकॉर्ड भी मौजूद रहेगा।

QR कोड से आसान और तेज भुगतान 
नई व्यवस्था के तहत बसों में क्यूआर कोड लगाए गए हैं, जिन्हें स्कैन कर यात्री सीधे भुगतान कर सकते हैं। यात्री अपने गंतव्य के अनुसार सही किराया खुद देख और चुका सकते हैं। इससे किराए में गड़बड़ी या गलतफहमी की संभावना लगभग खत्म हो गई है। डिजिटल पेमेंट का रिकॉर्ड भी सुरक्षित रहता है, जिससे किसी विवाद की स्थिति में जांच आसान हो जाती है। यह सुविधा रोजाना सफर करने वाले यात्रियों के लिए उपयोगी साबित होगी।

छात्रों-नौकरीपेशा लोगों को होगा फायदा 
iBus सेवा का सबसे अधिक उपयोग छात्र और ऑफिस जाने वाले लोग करते हैं। ऐसे में डिजिटल भुगतान से उनका समय भी बचेगा और असुविधा भी कम होगी। पहले कई बार जल्दबाजी में अधिक किराया देना पड़ता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। यात्रियों ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे जरूरी बदलाव बताया है। उनका मानना है कि इससे यात्रा का अनुभव और बेहतर होगा।

लोगों का पब्लिक ट्रांसपोर्ट में बढ़ेगा भरोसा 
अधिकारियों के अनुसार, इस कदम का मकसद बस सेवा को आधुनिक और व्यवस्थित बनाना है। डिजिटल टिकटिंग से संचालन में पारदर्शिता आएगी और शिकायतों में कमी होगी। इसके साथ ही यात्रियों का भरोसा सार्वजनिक परिवहन पर बढ़ेगा। यह पहल भले ही देर से शुरू हुई हो, लेकिन इसे एक सकारात्मक बदलाव माना जा रहा है। यह सिस्टम आने वाले समय में शहर के ट्रांसपोर्ट मॉडल को और बेहतर बना सकता है।

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