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गाजियाबाद में एक पाकिस्तानी जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है जो इंटरनेट कैमरों के जरिए देश की संवेदनशील जानकारी सीमा पार भेज रहा था।

गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के साहिबाबाद में एक बीट कांस्टेबल की सतर्कता से देश के खिलाफ चल रही एक बहुत बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ है। जांच में सामने आया है कि संवेदनशील इलाकों में लगाए गए इंटरनेट से जुड़े सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की लाइव फीड सीधे पाकिस्तानी सर्वरों को भेजी जा रही थी।

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए गृह मंत्रालय ने देशभर के सीसीटीवी नेटवर्क का ऑडिट करने और जासूसी को रोकने के लिए नए सख्त नियम लागू करने का निर्णय लिया है।

​साहिबाबाद से खुला जासूसी का 'नेटवर्क' और 22 गिरफ्तारियां 
जासूसी का यह मामला तब सामने आया जब साहिबाबाद इलाके में सोलर पावर से चलने वाले कुछ छोटे और संदिग्ध कैमरे संवेदनशील जगहों के आसपास लगे पाए गए। ये कैमरे विदेशी सर्वरों से जुड़े थे और देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन चुके थे।

पुलिस और जांच एजेंसियों ने इस नेटवर्क पर त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक 22 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें महिलाएं और नाबालिग भी शामिल हैं। इनके पास से कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और कैमरे जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं।

​चीन निर्मित कैमरों से डेटा चोरी का बड़ा खतराभारत में इस्तेमाल होने वाले लगभग 80% सीसीटीवी कैमरे चीन के हैं, जिन्हें सुरक्षा के लिहाज से बेहद जोखिम भरा माना जाता है। अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश पहले ही चीनी कैमरों पर प्रतिबंध लगा चुके हैं।

गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, इन कैमरों के जरिए डेटा चोरी और जासूसी की संभावना हमेशा बनी रहती है। यही वजह है कि केंद्र सरकार अब देशभर के सीसीटीवी नेटवर्क की सुरक्षा जांच आईबी और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर शुरू करने जा रही है।

​1 अप्रैल से नया नियम: सिर्फ 'STQC सर्टिफाइड' कैमरे ही बिकेंगे 
सरकार ने डेटा लीक और हैकिंग को रोकने के लिए 1 अप्रैल 2026 से कड़े मानक तय कर दिए हैं। अब बाजार में सिर्फ वही कैमरे बिक सकेंगे जो सर्टिफाइड और हैकिंगप्रूफ होंगे।

​कैमरों को सरकारी सुरक्षा जांच (Standardisation Testing and Quality Certification) पास करना अनिवार्य होगा, वर्तमान में बाजार में मौजूद सैकड़ों मॉडलों में से केवल 7 कंपनियों के 53 मॉडल ही ऐसे पाए गए हैं, जिन्हें पूरी तरह सुरक्षित और सर्टिफाइड माना गया है।

​आम लोगों की प्राइवेसी और निजता पर भी संकट 
यह खतरा केवल राष्ट्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि आम नागरिकों की प्राइवेसी पर भी बड़ा हमला है। इजराइल द्वारा ईरान के ट्रैफिक कैमरों को हैक कर वीआईपी मूवमेंट ट्रैक करने और सोनीपत रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की फुटेज हैक कर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शेयर करने जैसे उदाहरण सामने आ चुके हैं।

IT Act की धारा 66E के तहत बिना अनुमति किसी की निजी फुटेज रिकॉर्ड करना या शेयर करना दंडनीय अपराध है, लेकिन एकीकृत डेटाबेस की कमी के कारण निगरानी तंत्र में खामियां बनी हुई हैं।

​स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल और रियल-टाइम मॉनिटरिंग की तैयारी 
जांच में यह भी पाया गया कि फिलहाल देशभर में अलग-अलग एजेंसियां अपने हिसाब से कैमरे लगाती हैं, जिनका कोई साझा कंट्रोल या डेटाबेस नहीं है। ऑडिट रिपोर्ट के बाद सरकार यूनिक रजिस्ट्रेशन और रियल-टाइम मॉनिटरिंग वाला एक एकीकृत नेटवर्क सिस्टम लागू कर सकती है।

इसके साथ ही, डेटा के दुरुपयोग को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता जैसे विशेषज्ञों ने भारी जुर्माने और सख्त कानून की जरूरत पर बल दिया है।

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