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आवारा कुत्तों के हमले में 24 घंटे के भीतर 15 हिरणों की मौत होने के बाद संजय वन वाटिका का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।

अम्बिकापुर। आवारा कुत्तों के हमले में 24 घंटे के भीतर 15 हिरणों की मौत होने के बाद संजय वन वाटिका का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। एक साथ 15 हिरणों की मौत को लेकरशासन भी गंभीर हो गया है। मुख्य वन संरक्षक सामान्य एवं मुख्य वन सरंक्षक होरभाम वाइल्ड लाइफ के नेतृत्व में अलग-अलग दो उच्च स्तरीय जांच समिति गठित कर मामले की जांच करने का निर्देश दिया है।

सरगुजा वनमण्डलाधिकारी अभिषेक जोगावत द्वारा फॉरेस्ट एसडीओ के नेतृत्व में गठित जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट दे दी है। डीएफओ की जांच रिपोर्ट में वाटिका की देखरेख के लिए तैनात वनकर्मियों एवं वन प्रबंधन समिति के सदस्यों की लापरवाही को हादसे का मुख्य कारण माना गया है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद विभाग ने वन प्रबंधन समिति शंकरघाट को वाटिका के संचालन से पृथक कर दिया है। वन प्रबंधन समिति वर्ष 2000 से वाटिका का संचालन करने के साथ ही वन्यजीवों एवं पक्षियों की देखरेख कर रही थी।

सैंपल भेजा जाएगा बरेली
वन मण्डलाधिकारी श्री जोगावत ने बताया कि पीएम रिपोर्ट में हिरणों की मौत कुत्तों के काटने से होने की पुष्टि हुई है। मृत हिरणों के गले एवं जांघों में कुत्तों के दांत के 2 सेमी गहरे घाव मिले हैं। मौत के कारणों की पुष्टि के लिए विभाग ने सभी मृत हिरणों के बिसरे को अलग-अलग पात्र में संरक्षित रखा है। मौत के कारणों को जानने विभाग ने हिरणों को दिए जा रहे आहार का भी नमूना चिकित्सकों से संरक्षित कराया है।

दो उच्च स्तरीय जांच दल गठित
आवारा कुत्तों के हमले में एक साथ 15 हिरणों की मौत होने के मामले को शासन ने भी गंभीरता से लिया है। प्रमुख वन संरक्षक ने मुख्य वन संरक्षक (सामान्य) एवं मुख्य वन संरक्षक वाइल्ड लाइफ के नेतृत्व में दो अलग-अलग जांच समिति गठित की है।

बढ़ सकती है समस्या
विभाग ने फिलहाल संजय वन वाटिका का संचालन बंद कर दिया है जिसके कारण हर दिन सैंकड़ों पर्यटक निराश होकर लौट रहे हैं। मैदानी वनकर्मियों के निलंबित होने एवं समिति को पृथक करने के बाद वाटिका में रह रहे 16 हिरण बड़ी संख्या में मोर-मोरनी सहित अन्य पशु-पक्षियों को समय पर चारा-पानी देने का संकट उत्पन्न हो गया है।

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