भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा संदेश देते हुए अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जयबीर सिंह की अदालत ने जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सदानंद वत्स और लिपिक घनश्याम को रिश्वत लेने का दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों दोषियों को चार-चार साल के कारावास के साथ-साथ 35-35 हजार रुपये के जुर्माने की सजा दी है।
विजिलेंस को दी शिकायत
यह मामला साल 2022 का है। रोहतक के भालौठ निवासी अमरजीत ने विजिलेंस को दी शिकायत में बताया था कि वह जींद के विजय नगर में 'स्मार्ट किड्स' नाम से एक मान्यता प्राप्त स्कूल चला रहे हैं।
धमकी देने के बाद थमाया नोटिस
मई 2022 में DEEO सदानंद वत्स और लिपिक घनश्याम स्कूल पहुंचे और नियमों का उल्लंघन बताकर कार्रवाई की धमकी दी। स्कूल संचालक द्वारा मान्यता के दस्तावेज दिखाने के बावजूद, अगस्त 2022 में स्कूल को 3 दिन में बंद करने का नोटिस थमा दिया गया।
रिश्वत की कि गई मांग
नोटिस को रफा-दफा करने और स्कूल को नियमों के अनुसार दिखाने के बदले में आरोपियों ने 5 लाख रुपये की रिश्वत मांगी। सौदा 2 लाख रुपये की पहली किस्त पर तय हुआ।
रंगे हाथों की गई गिरफ्तारी
शिकायतकर्ता के भांजे अमन के माध्यम से जब पैसे देने की बात तय हुई, तो विजिलेंस की टीम ने जाल बिछाया। विजिलेंस ने लिपिक घनश्याम को रिश्वत की राशि के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार किया था, जिसके बाद जांच की आंच DEEO तक भी पहुंची।
अदालत का फैसला
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पुख्ता सबूत पेश किए। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद DEEO सदानंद वत्स और लिपिक घनश्याम को दोषी पाया। सोमवार को सुनाए गए फैसले में जेल की सजा के साथ आर्थिक दंड भी लगाया गया है।
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