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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कांस्टेबलों की पूरी भर्ती प्रक्रिया और फाइनल सलेक्शन लिस्ट को रद्द करने से इनकार कर दिया है।

पंकज गुप्ते- बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में पुलिस कांस्टेबल भर्ती को लेकर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। हाईकोर्ट ने पूरी भर्ती प्रक्रिया और फाइनल सलेक्शन लिस्ट को रद्द करने से इनकार कर दिया है। याचिकाकर्ताओं ने भर्ती रद्द करने और CBI जांच की मांग की थी। 

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने 129 संदिग्ध अभ्यर्थियों की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने कहा है कि, इनके दोषी पाए जाने पर ही चयन रद्द होगा, पूरी भर्ती पर असर नहीं पड़ेगा। जस्टिस पीपी साहू के सिंगल बेंच से यह फैसला आया है।

कोर्ट ने कहा- भर्ती में व्यापक स्तर पर अनियमितता नहीं हुई 
बिलासपुर हाईकोर्ट ने कांस्टेबल (GD) भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों पर अहम फैसला सुनाते हुए पूरी चयन प्रक्रिया और फाइनल सलेक्शन लिस्ट रद्द करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि, भर्ती में व्यापक स्तर पर अनियमितता साबित नहीं हुई है, इसलिए पूरी प्रक्रिया को निरस्त करना उचित नहीं है।

हालांकि, जिन अभ्यर्थियों पर गड़बड़ी के आरोप सामने आए हैं, उनकी दोबारा जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। दरअसल याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि, फिजिकल टेस्ट (PET) में भ्रष्टाचार और हेराफेरी हुई। कुछ अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ दिया गया और चयन प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही। इस आधार पर उन्होंने पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द कर नई भर्ती और CBI जांच की मांग की थी।

यहां पढ़िए.. छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का आदेश

व्यापक भ्रष्टाचार मानना उचित नहीं 
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि कुल करीब 32,570 अभ्यर्थियों में से केवल 129 मामलों में अंक में गड़बड़ी सामने आई, जिनमें से सिर्फ 3 अभ्यर्थी फाइनल चयन सूची में शामिल हैं। ऐसे में इसे व्यापक भ्रष्टाचार मानना उचित नहीं है। हाईकोर्ट ने साफ किया कि कुछ गड़बड़ियों के आधार पर पूरी चयन प्रक्रिया रद्द करना न्यायसंगत नहीं है, बल्कि दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों को अलग-अलग पहचानना जरूरी है। इसी आधार पर कोर्ट ने राज्य को निर्देश दिया कि संदिग्ध 129 अभ्यर्थियों और विशेष रूप से चिन्हित मामलों की वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से जांच कराई जाए। 

CBI जांच की मांग भी खारिज 
साथ ही कोर्ट ने CBI जांच की मांग भी खारिज कर दी और कहा कि बिना ठोस साक्ष्य के ऐसे निर्देश नहीं दिए जा सकते। अंत में याचिका को निपटारा करते हुए कोर्ट ने कहा कि यदि जांच में कोई अभ्यर्थी दोषी पाया जाता है तो उसका चयन निरस्त किया जाए।

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