रामानुजगंज। छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने दावा किया है कि आने वाले कुछ सालों में बलरामपुर जिला प्रदेश का सबसे विकसित जिला होगा। रोड, बिजली, पानी, सिंचाई, शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र की सारी कमियां दूर कर ली जाएंगी। खनिज की प्रचुर मात्रा इस जिले को सबसे अग्रणी बनाएगी। जिला संवाद कार्यक्रम में हरिभूमि-आईएनएच के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने कृषि मंत्री श्री नेताम से बातचीत की।
सवाल: सनवाल क्षेत्र का एक युवा इस मुकाम तक कैसे पहुंचा ?
नेतामः 1990 के दशक में जब राजनीति की शुरुआत की तो उससे पहले क्षेत्र की समस्याओं को देखकर कभी भी अच्छा नहीं लगा। लोगों की परेशानियां दिल में दर्द पैदा करती थी। एक जगह से दूसरे जगह पहुंचाने के लिए ना तो सड़कें थीं और ना ही पुलिया। स्कूल और कॉलेज स्तर से राजनीति की शुरुआत करते हुए आज यहां तक पहुंचा। इस दौरान लोगों का सहयोग और भरोसा मिलता गया।

सवाल: 2018 के चुनाव में आखिर इतनी करारी हार कैसे हुई ?
नेताम: लोकतंत्र की यही तो खूबसूरती है जनता के मन में क्या है यह कोई नहीं जानता। सन 2000 से लेकर 2018 तक भाजपा की सरकार थी तो हमने खूब काम किया। हर वर्ग के लोगों को ध्यान रखने की पूरी कोशिश की। 2018 में प्रदेश की जनता ने कांग्रेस को एक मौका देने की सोच रखी। इसलिए चुनाव में उनकी जीत हुई। 5 सालों में कांग्रेस ने इतना काम कर दिया कि लोग त्रस्त हो गए। इसी कारण 2023 के चुनाव में कांग्रेस हारी और भाजपा को सरकार बनाने का मौका मिला। प्रदेश में गोठान और गोबर तक में भ्रष्टाचार किया गया। कांग्रेस के द्वारा शराब में मिलावट तो होती ही रही डुप्लीकेट शराब भी तैयार करवाई। रेत और कोयले का अवैध कारोबार हर जिले और शहर में जारी था। पकड़े जाने से डर से कांग्रेसियों ने रिकॉर्ड में आग तक लगवा दी। इसी कारण कांग्रेस सरकार में रॉयल्टी कम जमा हुई और सरकारी खजाने को क्षति पहुंची।
सवाल: बलरामपुर जिले में रेत और कोयले के अवैध कारोबार पर क्या कहेंगे?
नेतामः अवैध काम कोई भी हो, सही नहीं कहा जा सकता। इस पर कार्रवाई करना और सख्ती बरतना शासन और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है। भाजपा सरकार फिलहाल इस पर पूरी तरह लगाम लग रही है। रेत घाटों का टेंडर किया गया है, ठेकेदारों से एग्रीमेंट किया जा रहा है, उनसे राशि जमा करवाई जा रही है, रायल्टी पर्ची जारी हो रही है। नियमों के तहत पर्यावरण अनुमति और वन विभाग से क्लीयरेंस लिया जा रहा है। सरकारी खजाने में इसी से राशि आ रही है जिसके तहत गरीबों के मकान और दूसरी योजनाओं पर काम हो रहा है।
सवालः इतना सब काम कर रहे हैं लेकिन अंबिकापुर से रामानुजगंज तक सड़क क्यों नहीं बन पा रही?
नेतामः यह सही है कि इस सड़क से आवागमन करने में आम जनता को परेशानी हो रही है। भाजपा सरकार का ध्यान लेकिन इस पर है। इसलिए ही इस सड़क को एनच में शामिल किया गया है। सड़क का टेंडर हो गया है और काम भी जारी है। उम्मीद करते हैं कि यह सड़क अगले 6 महीने में बनकर पूरी हो जाएगी। पर्यावरण क्लियरेंस से लेकर वन विभाग की अनुमति भी मिल गई है। यह भी तो ध्यान देना होगा कि सबसे अधिक दौरे मंत्री और नेताओं को करने होते हैं तो परेशानी हमारी भी है। भरोसा रखिए सड़क जल्द बन जाएगी।
सवालः जिले के लिए कोई भी योजना आती है तो उसका बलरामपुर, रामानुजगंज और दूसरे क्षेत्रों में संतुलन कैसे बिठाते हैं?
नेतामः बलरामपुर हमारा जिला है। सभी योजनाओं की बराबर भागीदारी सभी क्षेत्र के लिए होती है। और अब तो पिछले सालों में एक मुख्यालय से दूसरे मुख्यालय की दूरी भी वैसी नहीं रही है। हालांकि सरकारी जमीनों की कमी सबसे बड़ी बाधा है। किसी भी परियोजना या योजना पर काम करने से पहले इस बारे में सोचना पड़ता है। हॉर्टिकल्चर परियोजना पर काम पिछले 2 सालों से हो रहा है लेकिन जमीन नहीं मिल रही है। इसके लिए एक साथ 80 एकड़ जमीन चाहिए जिसकी तलाश की जा रही है। दरअसल यह पूरा जिला अनुसूचित क्षेत्र में आता है इसलिए परेशानी बढ़ती है। सड़के, पुलिया, कॉलेज और विद्यालयों के लिए जमीन की समस्या भी इसीलिए होती है। हर बार वन अधिनियम के तहत पेंच फंस जाता है। सुप्रीम कोर्ट भी इस बारे में सख्त है और सभी प्रदेशों के मुख्य सचिवों से इस बारे में एग्रीमेंट और शपथ पत्र मांगा जाता है कि वन विभाग की किसी जमीन पर कब्जा नहीं किया जाए। फिर भी राज्य सरकार योजनाओं के लिए जमीन खोज रही है और समाधान जल्द निकाल दिया जाएगा।
सवालः रामानुजगंज क्षेत्र में सेंट्रल स्कूल खोलने की मांग हो रही है?
नेतामः पूरा भरोसा रखिए जल्द ही सेंट्रल स्कूल की सौगात क्षेत्रवासियों को मिल जाएगी। इसके लिए राज्य और केंद्र स्तर पर चर्चा जारी है। क्षेत्र के सांसद की ओर से भी पत्र लिखा गया है। इसके साथ ही ट्राईबल स्कूल भी खोले जाएंगे। ध्यान रखना होगा कि कोई भी योजना आने के बाद ही जमीन की तलाश होती है और इस पर राज्य सरकार का पूरा ध्यान है। भाजपा सरकार कोई भी काम हवा में नहीं करती। नवोदय विद्यालय रामानुजगंज में खुल गया है। कृषि विज्ञान केंद्र के लिए 50 एकड़ की जमीन रामानुजगंज में स्वीकृत हो गई है।
सवालः भाजपा के इस 2 साल के कार्यकाल में बलरामपुर जिले को क्या-क्या मिला?
नेताम: इसका जवाब तो जनता से ही पूछना चाहिए। सबसे बड़ी बात पिछले दो सालों में भाजपा सरकार ने प्रदेश की जनता का विश्वास जीता है। लोकतंत्र में यदि उम्मीद पर खरा नहीं उतरे तो जनता सत्ता से उतार देती है। विधानसभा चुनाव में जीतने के बाद लोकसभा चुनाव की 11 में से 10 सीटों पर भाजपा की जीत हुई है। इसके बाद नगरी निकाय के चुनाव, जनपद से लेकर जिला स्तर के सभी चुनाव में भाजपा की जीत बताती है कि लोगों का विश्वास पार्टी पर बढ़ा है।

सवालः पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल फिर से सक्रिय हैं, इसे किस रूप में देखते हैं?
नेतामः यह बहुत अच्छी बात है। विपक्ष का मजबूत होना लोकतंत्र के लिए सबसे बेहतर होता है इसलिए इसे सकारात्मक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। विपक्ष ही प्रशासन को आईना दिखाता है तो सरकार को बेहतर काम करने की प्रेरणा मिलती है।
सवालः आप अचानक कितने दार्शनिक क्यों हो गए हैं?
नेतामः ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। छत्तीसगढ़ की जनता बिल्कुल अलग है। 2030 के चुनाव में कोई नहीं कह सकता था कि कांग्रेस हारेगी और भाजपा की सरकार बनेगी। सभी मीडिया, समाचार विश्लेषक, जानकार कहते थे कि कांग्रेस रिपीट हो रही है। लेकिन प्रदेश की जनता की धारणा बदली और लोगों का विश्वास बीजेपी पर जगा। इसलिए ही 2 साल पहले के चुनाव में भाजपा की सर्वाधिक मतों से जीत हुई।
सवालः अफीम की खेती और बॉक्साइट के अवैध उत्खनन पर क्या कहेंगे?
नेतामः पहले भी कहा गया है कि कोई भी अवैध कारोबार भाजपा की सरकार में संरक्षण नहीं पा सकता। अफीम की खेती पकड़ी जा रही है तो जिला प्रशासन, पुलिस द्वारा कार्रवाई भी हो रही है। इसमें किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े हुए लोगों का नाम पाया जाता है तो पूरी वैधानिक कार्रवाई होगी।

सवालःआपकी सरकार के 3 साल बचे हैं, क्या योजनाएं हैं?
नेतामः पहले भी जनता ने सेवा करने के लिए मुझे मौका दिया था जिस पर खरा उतरने की पूरी कोशिश की गई है। आगे भी वही सेवा जारी रहेगी। कहीं कोई कमी रही होगी तो उसे दूर किया जाएगा। सिंचाई, पानी, बिजली, स्वास्थ्य पर पूरा फोकस है। खासतौर पर रामानुजगंज बलरामपुर में स्वास्थ्य केंद्र खोले गए हैं। अगले कुछ सालों में यह जिला प्रदेश का सबसे विकसित और अग्रणी जिला होगा। जिले में खनिज और रत्न की प्रचुर मात्रा है। किसी भी इंडस्ट्री को और क्या चाहिए। इसलिए सिंचाई की सुविधा पर ध्यान दिया जा रहा है। सड़के बनने के बाद कनेक्टिविटी और आसान होगी। जिले में कोयले और रेत की भी कमी नहीं है।
सभी को मिलकर करना चाहिए प्रयास : डॉ. तिर्की
अंबिकापुर के पूर्व महापौर और विधायक प्रत्याशी रहे डॉ. अजय तिर्की ने कहा कि रामानुजगंज के लोगों ने मुझे प्यार, अपनापन दिया। मैने भी यहां लोगों की सेवा की। उन्होंने कृषि मंत्री पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पक्ष में पक्ष चलता रहता है, लेकिन 35 साल मंत्री और विधायक रहने के बाद भी उन्होंने क्षेत्र के लिए काम नहीं किया। अंबिकापुर से रामानुजगंज 1 घंटे में पहुंचना चाहिए था लेकिन सड़क की स्थिति खराब है, क्षेत्र के कॉलेज में शिक्षक होने चाहिए थे। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हासिल कर युवाओं को कलेक्टर एसपी बनकर निकालना चाहिए थे, लेकिन वह स्थिति आज तक नहीं बन पाई। उन्होंने कहा कि मैंने स्वयं अपने बच्चों को पीजी का एग्जाम दिलाया 12025 में परीक्षा देने के बाद 2026 में एडमिशन हो सका। इस एक साल के कीमत की भरपाई कौन करेगा। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज से पहले जिले में जिला अस्पताल व स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्था को दुरुस्त करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। कांग्रेस के 5 साल के कार्यकाल में सुविधाओं के विस्तार नहीं होने को लेकर डॉ. तिर्की ने कहा कि टीएस सिंहदेव के स्वास्थ्य मंत्री रहते जिला अस्पताल में डायलिसिस सोनोग्राफी की सुविधा हुई विशेषज्ञ चिकित्सकों की पदस्थापना की गई, कोरोना काल में ऑक्सीजन प्लांट से लेकर अन्य स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित की गई। सत्ता में जो रहेगा उसे काम करना पड़ेगा।
साइकिल से जाते थे ससुराल, पहला चुनाव सिर्फ डेढ़ लाख में जीता
अपनी संघर्ष यात्रा को याद करते हुए श्री नेताम ने कहा कि उस दौर में सारा इलाका जंगल था। 1990 तक ग्रामीण डामरीकृत सड़क क्या होती है, नहीं जानते थे। लोग शिकार करने इस क्षेत्र में आया करते थे। उन्होंने जब रामानुजगंज में शिक्षा ली, तब समाज के लिए कुछ करने की बात मन में आई। 1987 में विवाह हुआ, परिवार ने कहा कुछ करो तो नौकरी की। साइकिल से ससुराल जाते थे। कैरियर में बिठाकर धर्मपत्नी को ले जाते थे। नौकरी से अलग मन समाज की ओर था। गरीबों, दलितों के लिए काम करने की इच्छा थी, लोग कहते थे क्या कर लोगे, लेकिन मन संघर्ष करने को तैयार था, तब पहली बार 1990 में टिकट मिला। साथियों के साथ मेहनत की और सिर्फ एक लाख चालीस हजार रुपए में पहला चुनाव जीत गए। इतने में अब एक बूथ की भी व्यवस्था नहीं होती। श्रीनेताम ने कहा कि उनका मूलमंत्र था.. जहां कम है, वहां हम हैं। अब तो ढलान की ओर आ गए हैं।










