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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चाइनीज मांझे से हो रही मौतों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सरकार से जवाब मांगा है।

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में प्रतिबंधित 'चाइनीज मांझे' के खुलेआम बिकने और इससे लगातार हो रहे हादसों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने राज्य सरकार को फटकार लगाई और पूछा कि जब इस पर प्रतिबंध लागू है, तो यह बाजारों में कैसे उपलब्ध है?

न्यायमूर्ति की खंडपीठ ने सरकार से जवाब तलब करते हुए पूछा है कि पिछले अभियानों के दौरान कितने दुकानदारों पर कार्रवाई की गई और इस घातक धागे की सप्लाई चेन को तोड़ने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।

​जानलेवा साबित हो रहा है प्रतिबंधित सिंथेटिक मांझा 
​सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि प्लास्टिक और कांच के मिश्रण से बना यह मांझा न केवल इंसानों के लिए जानलेवा है, बल्कि मूक पक्षियों के लिए भी काल साबित हो रहा है।

आए दिन दोपहिया वाहन चालकों के गले कटने और गंभीर रूप से घायल होने की खबरें सामने आती रहती हैं। कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई कि प्रशासन की ढिलाई के कारण प्रतिबंध के बावजूद चोरी-छिपे इसकी बिक्री जारी है, जिससे आम जनता की जान जोखिम में बनी हुई है।

​सरकार से कार्रवाई की प्रगति रिपोर्ट तलब

​अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि केवल आदेश जारी करना काफी नहीं है, बल्कि उसका धरातल पर क्रियान्वयन होना जरूरी है। हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह अगली सुनवाई तक एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करे। इसमें यह स्पष्ट होना चाहिए कि प्रदेश भर में चाइनीज मांझे के भंडारण और बिक्री के खिलाफ अब तक कितने छापे मारे गए, कितनी बरामदगी हुई और दोषियों के खिलाफ क्या कानूनी कार्रवाई की गई।

​प्रशासन और पुलिस की जवाबदेही तय करने के निर्देश 
हाईकोर्ट ने इस मामले में स्थानीय पुलिस और नगर निकायों की जवाबदेही पर भी सवाल उठाए। कोर्ट का मानना है कि बिना स्थानीय प्रशासन की जानकारी के इस तरह का अवैध कारोबार फल-फूल नहीं सकता।

कोर्ट ने संकेत दिया है कि यदि अगली सुनवाई तक संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो संबंधित क्षेत्र के जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जा सकती है। कोर्ट का उद्देश्य इस जानलेवा मांझे को पूरी तरह से बाजार से बाहर करना है ताकि निर्दोष लोगों की जान बचाई जा सके।

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