महाराष्ट्र के ठाणे में राजनीतिक हलचल उस समय तेज हो गई जब ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) की कॉर्पोरेटर शहर शेख पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र जमा करने का आरोप लगाया गया।
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि शहर शेख ने चुनाव लड़ने के लिए आरक्षित सीट का लाभ उठाने के उद्देश्य से जाली दस्तावेजों का सहारा लिया। इस मामले के सामने आने के बाद नगर निगम और स्थानीय राजनीति में उनके पद की वैधता को लेकर सवाल उठने लगे हैं और मामले की जांच की मांग तेज हो गई है।
इन आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कॉर्पोरेटर शहर शेख ने सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उनके पास मौजूद सभी दस्तावेज और जाति प्रमाण पत्र पूरी तरह से वैध हैं और कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी किए गए हैं।
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— Sahar Shaikh ( AIMIM ) (@Saharshaikfans) April 20, 2026
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शहर शेख ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल उनकी बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर उन्हें बदनाम करने के लिए यह 'राजनीतिक साजिश' रच रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह किसी भी जांच का सामना करने के लिए तैयार हैं और सच्चाई जल्द ही सबके सामने आएगी।
ठाणे नगर निगम और संबंधित विभाग अब इस मामले की जांच में जुट गए हैं। जाति प्रमाण पत्र की वैधता की जांच के लिए गठित समिति दस्तावेजों का सत्यापन करेगी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो शहर शेख को अपनी कॉर्पोरेटर की सीट गंवानी पड़ सकती है और उन पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
हालांकि, शहर शेख के समर्थकों का कहना है कि प्रशासन पर दबाव डालकर उन्हें निशाना बनाया जा रहा है और वे इसके खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
इस विवाद ने ठाणे में AIMIM और अन्य विपक्षी दलों के बीच जुबानी जंग तेज कर दी है। स्थानीय निकाय चुनावों के करीब होने के कारण इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप को काफी अहम माना जा रहा है।
AIMIM के स्थानीय नेतृत्व ने भी शहर शेख का समर्थन करते हुए कहा है कि पार्टी अपने जनप्रतिनिधि के साथ खड़ी है और लोकतांत्रिक तरीके से इन साजिशों का जवाब देगी। शहर भर में इस मुद्दे को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है और अब सबकी नजरें आधिकारिक जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।










