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छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के लिए एक बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर क्रांति की तैयारी है। रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर के जरिए अब यह क्षेत्र सीधे अंतरराष्ट्रीय व्यापार नेटवर्क से जुड़ने की ओर बढ़ रहा है।

रायपुर | छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के लिए एक बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर क्रांति की तैयारी है। रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर के जरिए अब यह क्षेत्र सीधे अंतरराष्ट्रीय व्यापार नेटवर्क से जुड़ने की ओर बढ़ रहा है। यह परियोजना न सिर्फ दूरी घटाएगी बल्कि बस्तर की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देने का काम करेगी।

घाटों की मुश्किल खत्म, सफर होगा आधा
अभी तक जगदलपुर से विशाखापट्टनम तक का सफर पहाड़ी और घुमावदार रास्तों से होकर गुजरता है, जिसमें 7 से 9 घंटे लंबा समय लगता है। नए कॉरिडोर के बनने से यही यात्रा घटकर करीब 3.5 से 4 घंटे में पूरी हो सकेगी। इससे ट्रांसपोर्ट सेक्टर को सीधा फायदा मिलेगा और लागत भी कम होगी।

नबरंगपुर बनेगा कनेक्टिविटी का मुख्य हब
ओडिशा के नबरंगपुर स्थित इंटरचेंज इस कॉरिडोर का अहम हिस्सा होगा। बस्तर से निकलने वाला ट्रैफिक कम दूरी तय कर सीधे इस हाईवे से जुड़ सकेगा। इससे क्षेत्र का संपर्क बंदरगाह शहर विशाखापट्टनम से तेज और आसान हो जाएगा।

Raipur-Visakhapatnam Economic Corridor

लोकल उत्पादों को मिलेगा इंटरनेशनल बाजार
इस परियोजना का सबसे बड़ा फायदा बस्तर के स्थानीय उत्पादकों को होगा। यहां की कॉफी, इमली, महुआ और पारंपरिक ढोकरा कला अब सीधे बंदरगाह तक पहुंच पाएगी। कम लागत में निर्यात होने से इन उत्पादों को वैश्विक बाजार में बेहतर पहचान और कीमत मिल सकेगी।

रोजगार और विकास के नए रास्ते
बेहतर कनेक्टिविटी से बस्तर, कांकेर और कोंडागांव जैसे जिलों में निवेश बढ़ने की संभावना है। इससे लॉजिस्टिक्स, उद्योग, सर्विस सेक्टर और छोटे व्यापार में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच भी मजबूत होगी।

खनिज और उद्योग को मिलेगा बढ़ावा
खनिज संपदा से भरपूर बस्तर क्षेत्र के लिए यह कॉरिडोर गेमचेंजर साबित हो सकता है। लौह अयस्क जैसे संसाधनों को तेजी से बंदरगाह तक पहुंचाने में मदद मिलेगी, जिससे निर्यात और औद्योगिक गतिविधियां बढ़ेंगी।

Raipur-Visakhapatnam Economic Corridor

पर्यटन को भी मिलेगा बूस्ट
बेहतर सड़क नेटवर्क से बस्तर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल जैसे चित्रकोट जलप्रपात, कुटुमसर गुफाएं और दंतेश्वरी मंदिर तक पहुंच आसान होगी। इससे देश-विदेश के पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है और स्थानीय संस्कृति को नई पहचान मिलेगी।

पर्यावरण का भी रखा जा रहा ध्यान
कॉरिडोर के निर्माण में पर्यावरण संतुलन को ध्यान में रखा गया है। जंगल क्षेत्रों में वन्यजीवों के लिए अंडरपास और ओवरपास बनाए जा रहे हैं। साथ ही ट्विन टनल जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि प्राकृतिक ढांचे को कम से कम नुकसान पहुंचे।

सरकार का दावा: विकास का नया युग
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का कहना है कि यह परियोजना बस्तर को मुख्यधारा से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगी। वहीं उपमुख्यमंत्री अरुण साव के अनुसार यह कॉरिडोर प्रदेश में औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों को नई गति देगा।

आर्थिक बदलाव की मजबूत नींव
करीब 16 हजार करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह 464 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड कॉरिडोर छत्तीसगढ़ के लिए विकास का नया मॉडल बन सकता है। यह न केवल यात्रा को आसान बनाएगा बल्कि बस्तर को वैश्विक व्यापार की मुख्यधारा में लाने का मार्ग भी तैयार करेगा।

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