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बारामती उपचुनाव में सुनेत्रा पवार की निर्विरोध जीत का रास्ता साफ हो गया है। कांग्रेस ने सहानुभूति दिखाते हुए अपना उम्मीदवार वापस ले लिया है। जानें क्या है इसके पीछे की बड़ी वजह।

Baramati Bypoll: महाराष्ट्र की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। बारामती विधानसभा उपचुनाव में अब कोई मुकाबला नहीं होगा। कांग्रेस पार्टी ने उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के खिलाफ अपने उम्मीदवार का नाम वापस लेने का फैसला किया है। नामांकन वापसी की समय-सीमा खत्म होने से ठीक पहले लिए गए इस फैसले ने सुनेत्रा पवार की निर्विरोध जीत का रास्ता साफ कर दिया है।

कांग्रेस ने क्यों पीछे खींचे कदम?
महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस फैसले की घोषणा की। उन्होंने बताया कि अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद पैदा हुई स्थितियों और मानवीय सहानुभूति को देखते हुए पार्टी ने यह कदम उठाया है। कांग्रेस ने पहले आकाश मोरे को सुनेत्रा पवार के खिलाफ मैदान में उतारा था, लेकिन अब उन्होंने अपना नामांकन वापस ले लिया है।

शरद पवार और रोहित पवार की अपील का असर
इस उपचुनाव में निर्विरोध जीत के लिए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे थे। वरिष्ठ नेता धनंजय मुंडे ने खुद हर्षवर्धन सपकाल से फोन पर बात की थी। इसके अलावा, शरद पवार और रोहित पवार ने भी कांग्रेस से अपील की थी कि वे बारामती के इस विशेष संदर्भ में चुनावी मुकाबले से हट जाएं। इन तमाम अपीलों के बाद कांग्रेस आलाकमान ने अपना रुख बदल लिया।

मल्लिकार्जुन खड़गे से मिलीं सुनेत्रा पवार
अपना नामांकन वापस लेने के फैसले से पहले सुनेत्रा पवार ने दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की थी। इसके अलावा उन्होंने महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रभारी रमेश चेन्नीथला और अन्य राज्य स्तरीय नेताओं के साथ भी चर्चा की थी। इन मुलाकातों के बाद ही कांग्रेस के रुख में नरमी देखी गई, हालांकि पार्टी ने स्पष्ट किया है कि बीजेपी के खिलाफ उनका संघर्ष जारी रहेगा।

अजित पवार के निधन से खाली हुई थी सीट
बारामती में यह उपचुनाव विमान हादसे में अजित पवार के दुखद निधन के कारण हो रहा है। कांग्रेस ने पहले शर्त रखी थी कि वे तभी पीछे हटेंगे जब इस हादसे के संबंध में FIR दर्ज की जाएगी। लेकिन अब बदले हुए घटनाक्रम में पार्टी ने सहानुभूति को प्राथमिकता दी है। सुनेत्रा पवार ने हाल ही में देवेंद्र फडणवीस से भी मुलाकात की थी, जहां बीजेपी ने उन्हें "बड़े भाई" की तरह पूरा समर्थन देने का भरोसा दिया था।

23 अप्रैल को होना था मतदान
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, बारामती सीट पर 23 अप्रैल को मतदान होना था। लेकिन अब सुनेत्रा पवार के खिलाफ कोई मजबूत उम्मीदवार मैदान में नहीं होने के कारण, उनकी जीत महज एक औपचारिकता रह गई है। बारामती को पवार परिवार का गढ़ माना जाता है और इस घटनाक्रम ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि संकट के समय महाराष्ट्र की राजनीति में रिश्तों और सहानुभूति की अपनी जगह है।

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