बाम्बे हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति एस. गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की पीठ ने मुंबई में फुटपाथों पर अवैध रूप से रेहड़ी लगाने के कारण पैदल चलने वालों और वाहनों को हो रही भारी परेशानी पर चिंता जताई है।
कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि बीएमसी और पुलिस को यह सुनिश्चित करना होगा कि फुटपाथ पर केवल वही लोग रेहड़ी लगाएं जो प्रशासन द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार 'योग्य' पाए गए हैं। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 99,000 लोग रेहड़ी लगाने के लिए पात्र पाए गए हैं, लेकिन फुटपाथों पर इससे कहीं अधिक भीड़ मौजूद है।
अवैध प्रवासियों और बांग्लादेशियों की पहचान पर जोर
सुनवाई के दौरान अदालत ने एक गंभीर मुद्दे की ओर इशारा किया। कोर्ट ने बीएमसी और पुलिस को विशेष निर्देश दिया है कि वे हॉकर्स और उनके सहायकों की नागरिकता की जांच करें।
कोर्ट ने कहा कि यदि जांच में कोई बांग्लादेशी या अन्य गैर-भारतीय नागरिक अवैध रूप से फुटपाथ पर व्यापार करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाए। इसमें संबंधित व्यक्तियों की गिरफ्तारी और उन्हें उनके देश वापस भेजने की प्रक्रिया भी शामिल हो सकती है।
पैदल यात्रियों और यातायात की सुगमता पहली प्राथमिकता
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में इस बात पर जोर दिया कि फुटपाथ का प्राथमिक उपयोग पैदल यात्रियों के चलने के लिए है। बीएमसी को निर्देश दिए गए हैं कि वह सभी अस्थायी और स्थायी स्टालों का मौके पर जाकर निरीक्षण करें।
अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि ये दुकानें या स्टॉल किसी भी तरह से राहगीरों के मार्ग में बाधा न डालें। यदि कोई स्टॉल नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसे तुरंत हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
अवैध कब्जे के खिलाफ पुलिस और बीएमसी का संयुक्त अभियान
अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि केवल 'योग्य' श्रेणी में आने वाले हॉकर्स ही लाइसेंस वाले स्थानों पर काम कर सकेंगे। प्रशासन को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वह अवैध रूप से फुटपाथ घेरने वालों को तत्काल प्रभाव से हटाए।
इसके साथ ही, पुलिस को हॉकर्स के सहायकों के सत्यापन की प्रक्रिया को भी तेज करने को कहा गया है, ताकि सुरक्षा और सुशासन के मानकों का पालन हो सके। इस आदेश के बाद अब मुंबई के फुटपाथों पर अवैध रूप से कब्जा जमाए बैठे लोगों के खिलाफ बड़े पैमाने पर सफाई अभियान चलने की उम्मीद है।










