मध्यप्रदेश। FSSAI के सख्त निर्देशों के बाद मध्यप्रदेश में बिना लाइसेंस के दुग्ध उत्पादों का विक्रय नहीं हो पाएगा। डेयरी सहकारी समितियों को छोड़कर सभी दूध उत्पादकों समेत दूध बेचने वालों के लिए लाइसेंस अनिवार्य कर दिया गया है। इसी के तहत मध्यप्रदेश में पंजीकरण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
एफएसएसएआई का नया आदेश
11 मार्च को जारी आदेश में कहा गया था कि, 'कुछ दुग्ध उत्पादक (जो डेयरी सहकारी समितियों के सदस्य नहीं हैं) तथा दूध विक्रेता खाद्य व्यवसाय गतिविधियों का संचालन बिना पंजीकरण कराए अथवा बिना लाइसेंस प्राप्त किए कर रहे हैं। यह परामर्श दिया जाता है कि वे अपने संचालन प्रारंभ करने अथवा जारी रखने से पूर्व अनिवार्य रूप से एफएसएसएआई के साथ अपना पंजीकरण कराएं।'
कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए
इसी आदेश में आगे कहा गया था कि, 'सभी राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों में दूध में संभावित मिलावट से संबंधित हाल की घटनाओं के दृष्टिगत पंजीकरण-लाइसेंसिंग आवश्यकताओं का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। केंद्र तथा सभी राज्यों की प्रवर्तन प्राधिकरणों से अनुरोध है कि वे संबंधित अधिकारियों और केंद्रीय लाइसेंसिंग प्राधिकरणों तथा खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को निर्देशित करें कि वे यह सत्यापित करें कि ऐसे सभी दुग्ध उत्पादकों एवं दूध विक्रेताओं के पास वैध पंजीकरण प्रमाणपत्र अथवा लाइसेंस उपलब्ध हो।'
एमपी देश का प्रमुख दूध उत्पादक राज्य
बता दें कि, मध्यप्रदेश की गिनती देश के प्रमुख दूध उत्पादक राज्यों में होती है। देश के कुल उत्पादन का 9 प्रतिशत (लगभग 213 लाख टन) अकेले एमपी में होता है। दूध के उत्पादन को 9 से बढाकर 20 प्रतिशत करने का लक्ष्य एमपी सरकार ने तय किया है।
कार्रवाई की रिपोर्ट करनी होगी पेश
FSSAI ने दूध एवं दुग्ध उत्पादों के लिए नियमित रूप से विशेष प्रवर्तन अभियान चलाने के संबंध में निर्देश पहले भी जारी किए थे। अब नए निर्देशों में इस संबंध में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी गई है। हर महीने की 15 और 30/31 तारीख तक बिना किसी चूक के प्राधिकरण के साथ जानकारी साझा करने के सख्त आदेश दिए गए हैं।










