चंडीगढ़ के सांसद मनीष तिवारी द्वारा संसद में उठाए गए सख्त सवालों के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। अब प्रशासन उन सभी कर्मचारियों का विभागवार ब्यौरा तैयार कर रहा है, जो तीन साल से अधिक समय से संवेदनशील पदों पर तैनात हैं।
संसद में गूंजा मुद्दा, सांसद ने मांगी जवाबदेही
सांसद मनीष तिवारी ने संसद में यह मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने सवाल किया है कि आखिर नियमों की अनदेखी कर कितने अधिकारी और कर्मचारी निर्धारित अवधि से अधिक समय से एक ही पद पर बने हुए हैं। सांसद की सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे खुद उस विशेष समिति के सदस्य हैं जो संसद में दिए गए जवाबों की निगरानी करती है। ऐसे में प्रशासन के लिए गलत या अधूरी जानकारी देना अब लगभग असंभव है।
क्या कहता है नियम?
केंद्रीय सतर्कता आयोग और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के नियमों के अनुसार, किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को संवेदनशील पदों पर तीन साल से अधिक समय तक तैनात नहीं रखा जा सकता। यह नियम कामकाज में पारदर्शिता बनाए रखने और भ्रष्टाचार या पक्षपात की संभावनाओं को खत्म करने के लिए बनाया गया है।
विभागों में मची खलबली
जानकारी के अनुसार, चंडीगढ़ प्रशासन के सतर्कता विभाग ने पिछले वर्ष जून, नवंबर और दिसंबर में बार-बार पत्राचार कर विभागों से रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन कई विभागों ने इसे हल्के में लिया और जानकारी नहीं दी। अब सांसद के संसद में सीधे हस्तक्षेप के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। नगर निगम में कुछ ऐसे भी कर्मचारी हैं जो 10 से 15 साल से एक ही सीट पर जमे हुए हैं।
तबादलों का बड़ा दौर तय
आने वाले दिनों में चंडीगढ़ के प्रशासनिक ढांचे में बड़े स्तर पर फेरबदल की संभावना है। रिपोर्ट तैयार होते ही 'रोटेशन पॉलिसी' के तहत बड़े पैमाने पर तबादले किए जा सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि यदि किसी विभाग ने संसद में भ्रामक जानकारी दी, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी हो सकती है।
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