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दिल्ली की कोर्ट ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के दूसरे मामले में 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा है। ED ने उन्हें 24 मार्च को गिरफ्तार किया था, जिसकी रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद अब उन्हें 17 अप्रैल तक जेल में रहना होगा।

फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी और अल-फलाह ग्रुप के सर्वेसर्वा जवाद अहमद सिद्दीकी की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। दिल्ली की एक अदालत ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) के एक ताजा मामले में 17 अप्रैल तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें 24 मार्च को गिरफ्तार किया था, जिसकी 10 दिनों की रिमांड अवधि पूरी होने के बाद शनिवार को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शीतल चौधरी प्रधान की अदालत में पेश किया गया। 

बड़ा भूमि घोटाला 
प्रवर्तन निदेशालय की तफ्तीश में जमीन हड़पने के एक बड़े खेल का खुलासा हुआ है। दिल्ली के मदनपुर खादर इलाके में 'खसरा नंबर 792' के तहत आने वाली करीब 1.14 एकड़ जमीन को अल-फलाह ग्रुप ने सरकारी दस्तावेजों में केवल 75 लाख रुपये में खरीदा हुआ दिखाया था।

एजेंसी के दावों के अनुसार इस विवादित जमीन की वास्तविक बाजार कीमत 45 करोड़ रुपये है। सिद्दीकी पर आरोप है कि उन्होंने 'तारबिया एजुकेशन फाउंडेशन' के मुख्य शेयरधारक के तौर पर कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर फर्जी कागजात तैयार किए और धोखाधड़ी के जरिए इस बेशकीमती संपत्ति का अधिग्रहण किया। 

छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ कर जुटाई अवैध संपत्ति 
जवाद अहमद सिद्दीकी पर यह ईडी का दूसरा प्रहार है। इससे पहले उन्हें 18 नवंबर 2025 को भी मनी लॉन्ड्रिंग के एक अन्य मामले में गिरफ्तार किया गया था। उस दौरान पेश की गई 260 पन्नों की चार्जशीट में बताया गया था कि सिद्दीकी ने यूनिवर्सिटी की फर्जी मान्यताओं और गलत पहचान का हवाला देकर हजारों विद्यार्थियों और उनके माता-पिता को ठगा।
इस धोखेबाजी के जरिए उन्होंने कुल 415.10 करोड़ रुपये की 'क्राइम प्रोसीड्स' इकट्ठा की। ईडी का कहना है कि शिक्षा के नाम पर जुटाए गए इस भारी-भरकम फंड का इस्तेमाल उन्होंने अपने निजी ऐशो-आराम और व्यक्तिगत कार्यों में किया। 

आतंकवाद से जुड़े तार 
अल-फलाह यूनिवर्सिटी केवल आर्थिक भ्रष्टाचार ही नहीं, बल्कि संदिग्ध आतंकी गतिविधियों के कारण भी सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर रही है। दिल्ली के लाल किले पर हुए भीषण धमाके, जिसमें 15 लोगों की मृत्यु हुई थी, उसके तार भी इसी संस्थान से जुड़े पाए गए थे। लाल किला विस्फोट से पहले पुलिस ने यूनिवर्सिटी के डॉ. मुजम्मिल शकील को दबोचा था, जिसकी निशानदेही पर पास के गांव से 2900 किलो विस्फोटक बरामद किया गया था। धमाके के बाद मेडिकल प्रोफेसर डॉ. शाहीन सईद की गिरफ्तारी और डॉ. उमरी नबी का खुद को बम से उड़ा लेना, इस संस्थान के आतंकी कनेक्शनों की ओर सीधा इशारा करता है।

जेल में रहेंगे सिद्दीकी, जांच का दायरा बढ़ा
शनिवार को रिमांड खत्म होने के बाद अदालत ने जवाद अहमद सिद्दीकी को अगले 14 दिनों के लिए जेल भेज दिया है। ईडी अब इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही है कि फर्जीवाड़े से जुटाई गई करोड़ों की संपत्ति का उपयोग कहीं देशविरोधी गतिविधियों में तो नहीं किया जा रहा था। फिलहाल, सिद्दीकी को 17 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में ही वक्त गुजारना होगा। 

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