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पर्यावरण नियमों की धज्जियां उड़ा रहे रेडी मिक्स कंक्रीट (RMC) प्लांटों के खिलाफ कार्रवाई की है। प्रदेश के 370 प्लांटों की जांच की गई। जिसमें आधे से अधिक अवैध पाए गए।

हरियाणा में पर्यावरण संरक्षण को लेकर प्रशासन अब पूरी तरह से सख्त नजर आ रहा है। राज्य में प्रदूषण फैलाने वाले और नियमों को ताक पर रखकर संचालित किए जा रहे रेडी मिक्स कंक्रीट (RMC) प्लांटों के विरुद्ध एक व्यापक अभियान चलाकर बड़ी कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई का ब्यौरा हाल ही में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में पेश की गई एक स्टेटस रिपोर्ट के माध्यम से सार्वजनिक हुआ है। 

आधे से अधिक प्लांट नियमों के खिलाफ 
हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) द्वारा की गई गहन जांच और मैपिंग के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पूरे प्रदेश में कुल 370 RMC प्लांट चिन्हित किए गए थे, जिनमें से 186 प्लांट बिना किसी कानूनी अनुमति या आवश्यक सहमति के अवैध रूप से चल रहे थे।
इसका सीधा अर्थ यह है कि राज्य में निर्माण सामग्री तैयार करने वाले आधे से ज्यादा केंद्र सरकारी मानकों और पर्यावरण सुरक्षा नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ा रहे थे। एनजीटी में 'दीपक बनाम हरियाणा राज्य' मामले की सुनवाई के दौरान यह रिपोर्ट नोडल अधिकारी की ओर से प्रस्तुत की गई।

190 प्लांटों पर क्लोजर नोटिस और मशीनों की जब्ती 
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने केवल जांच ही नहीं की, बल्कि उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ त्वरित और कठोर कदम भी उठाए हैं। 
• इकाइयों को बंद करने का आदेश : रिपोर्ट के मुताबिक, नियमों की अवहेलना करने वाले कुल 190 प्लांटों के खिलाफ क्लोजर एक्शन लिया गया है। इसमें वे प्लांट भी शामिल हैं जिनके पास दस्तावेज अधूरे थे या जो प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों का उपयोग नहीं कर रहे थे।
• मशीनों को हटाया गया : भविष्य में अवैध संचालन को रोकने के लिए कई जिलों में भारी मशीनों को पूरी तरह से डिस्मंतल (हटाना) कर दिया गया है।
• भारी भरकम जुर्माना : पर्यावरण को पहुंचाई गई क्षति की भरपाई के लिए 108 प्लांटों पर भारी 'पर्यावरण मुआवजा' (Environmental Compensation) लगाया गया है, जिसकी राशि करोड़ों में है।  

सिलिका डस्ट पर लगाम 
इन प्लांटों के खिलाफ कार्रवाई का मुख्य कारण हवा में घुलती सिलिका डस्ट है। निर्माण प्रक्रिया के दौरान उड़ने वाली यह धूल फेफड़ों के लिए बेहद घातक साबित होती है और AQI (वायु गुणवत्ता सूचकांक) को तेजी से बिगाड़ती है। अब नए दिशा-निर्देशों के तहत सख्त शर्तें लागू की गई हैं। 
1. कवरिंग अनिवार्य: फीडिंग हॉपर और कन्वेयर बेल्ट को पूरी तरह से ढकना अनिवार्य होगा। 
2. वाटर स्प्रिंकलिंग: धूल को हवा में मिलने से रोकने के लिए आधुनिक वॉटर स्प्रिंकलिंग सिस्टम का होना जरूरी है।
3. CTE और CTO प्रमाण पत्र: बिना 'स्थापना की सहमति' (CTE) और 'संचालन की सहमति' (CTO) के कोई भी नया प्लांट स्थापित नहीं किया जा सकेगा। 

निर्माण क्षेत्र में मचा हड़कंप
प्रशासन की इस 'जीरो टॉलरेंस' नीति से पूरे हरियाणा के निर्माण क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। सरकार और प्रदूषण बोर्ड का मुख्य उद्देश्य दिल्ली-NCR समेत पूरे प्रदेश की आबोहवा में सुधार करना है। इस कार्रवाई से न केवल प्रदूषण के स्तर में गिरावट आने की उम्मीद है, बल्कि यह उन उद्योगों के लिए भी एक कड़ा संदेश है जो विकास के नाम पर पर्यावरण के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। 
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में भी ऐसे औचक निरीक्षण जारी रहेंगे और मानकों का उल्लंघन करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।   

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